कैसे किया जाता है अनुष्ठान
महिलाओं के कमर में जुड़वा नींबू, श्रीफल, पंचमेवा एवं चावल की पोटली बांधी जाती है। तत्पश्चात सभी दंपतियों के हाथ में दीपक रखते हुए पूजा अर्चना की जाती है। दंपती पूरी रात जलता दीया हाथ में लेकर भगवान शिव (कमलेश्वर) की पूजा करते है। सुबह स्नान के बाद महंत दंपतियों को आशीर्वाद देकर पूजा संपन्न करते हैं। ऐसी मान्यता है कि खड़ा दीया अनुष्ठान करने से दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है।
यह है मान्यता
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, देवता दानवों से पराजित हो गए। तब वह भगवान विष्णु की शरण में गए। दानवों पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु यहां भगवान शिव की तपस्या करने आए। पूजा के दौरान वह शिव सहस्रनाम के अनुसार शिवजी के नाम का उच्चारण कर सहस्र (एक हजार) कमलों को एक-एक करके शिवलिंग पर चढ़ाने लगे। विष्णु की परीक्षा लेने के लिए शिव ने एक कमल पुष्प छिपा लिया।
शिव ने दिया था संतान प्राप्ति का वर
एक कमल पुष्प कम होने से यज्ञ मरं कोई बाधा न पड़े, इसके लिए विष्णु ने अपना एक नेत्र निकालकर अर्पित करने का संकल्प लिया। इससे प्रसन्न होकर शिव ने भगवान विष्णु को अमोघ सुदर्शन चक्र दिया। जिससे विष्णु से राक्षसों का विनाश किया। सहस्र कमल चढ़ाने की वजह से इस मंदिर को कमलेश्वर महादेव मंदिर कहा जाने लगा। इस पूजा को एक निसंतान ऋषि दंपति देख रहे थे। मां पर्वती के अनुरोध पर शिव ने उन्हे संतान प्राप्ति का वर दिया। तब से यहां कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (बैकुंठ चतुर्दशी) की रात संतान की मनोकामना लेकर लोग पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर से हटा अतिक्रमण
कमलेश्वर महादेव मंदिर जल्द ही अपने भव्य स्वरूप में नजर आएगा। इसके लिए मंदिर परिसर से अतिक्रमण ध्वस्त किया गया है। महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि स्थानीय विधायक डॉ. धन सिंह रावत के प्रयासों से मंदिर नए स्वरूप में नजर आएगा। कहा कि प्रशासन के सहयोग से मंदिर क्षेत्र में डेढ़ नाली भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना था, जिसमें से एक नाली से अतिक्रमण हटा दिया गया है। यहां मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार बनेगा, साथ ही प्रांगण बड़ा होने से भक्तों को दर्शन करने में सुविधा होगी।