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2013 केदारनाथ आपदा के छह साल: अब तक की सबसे भीषण जलप्रलय, हजारों जिंदगियां दफन, तस्वीरें

Mon, 17 Jun 2019 09:22 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में 16 जून 2013 को अब तक की सबसे भीषण जल प्रलय आई थी। केदारनाथ में आई इस जल प्रलय ने हजारों जिंदगियां लील लीं थी। केदारनाथ और प्रदेश के सभी पहाड़ी जिलों रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़ की करीब नौ लाख आबादी आपदा की जद में आ गई थीं। सड़कें, पुल और संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गए थे।
 
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13 नेशनल हाईवे, 35 स्टेट हाईवे, 2385 जिला व ग्रामीण सड़कें व पैदल मार्ग और 172 बड़े और छोटे पुल बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश में नष्ट हो गए थे। आपदा के दौरान 4200 से ज्यादा गांवों से पूरी तरह संपर्क टूट गया था। 2141 भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे। 11759 भवनों को आशिंक क्षति पहुंची थी। तीन हजार से ज्यादा भवनों को सामान्य हानि हुई थी। 995 सरकारी भवन जिनमें स्कूल भवन भी शामिल थे, उनका अस्तित्व मिट गया। 11091 मवेशी मारे गए। 1308.96 हेक्टेयर कृषि भूमि बह गई थी। 
 
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छह साल बाद भी केदारनाथ में जल प्रलय के समय के नर कंकाल बरामद हो रहे हैं। इस जलप्रलय में करीब 4435 लोग मारे गए या लापता हो गए। इनमें 991 मृतक उत्तराखंड के थे, जिनमें बड़ी संख्या केदारनाथ धाम में पूजा-पाठ और होटल के कारोबार से जुड़े लोगों की थी। प्रशासन ने 197 लोगों के शव बरामद किए। सर्च ऑपरेशन में करीब 555 कंकाल खोजे गए, जिनमें से डीएनए जांच के बाद 186 की पहचान हो सकी। सर्च ऑपरेशन के दौरान एयरफोर्स और एनडीआरएफ के 18 जवान और 26 सरकारी कर्मचारियों की भी मौत हो गई थी।

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एक नजर में...
- प्रदेश सरकार ने 92296.21 करोड़ रुपये का पुनर्निर्माण पैकेज मांगा था।
- 7346.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में दी।
- 6,259.84 करोड़ रुपये मध्यम और दीर्घकालिक पुननिर्माण को मंजूरी मिली।
-4617.27 करोड़ रुपये पैकेज के तहत केंद्र सरकार ने अवमुक्त किए।
-3708.27 करोड़ रुपये अब तक राहत और पुनर्निर्माण कार्य पर खर्च किए जा चुके हैं।
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राहत कोष से सरकार ने उत्तराखंड के रहने वाले मृतकों के परिवारों को सात लाख रुपये और बाहरी राज्यों के मृतक आश्रित को साढ़े तीन लाख रुपये राहत राशि के तौर पर दिए गए। डिजास्टर रिकवरी परियोजना के तहत बेघर हो गए 2499 लोगों को आवास बनाने के लिए पांच लाख रुपये की राशि चार किस्तों में दी गई। 

 
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आपदा से जुड़े कुछ प्रश्न...
 गांवों का विस्थापन कब होगा?
-450 से ज्यादा संवेदनशील गांव हैं जिन्हें सरकार सुरक्षा की दृष्टि से रहने लायक नहीं मानती है। इन गांवों का पुनर्वास व विस्थापन होना है। मगर इसके लिए सरकार को करीब नौ हजार करोड़ रुपये चाहिए। 

मानकों में बदलाव कब होगा?
 -राहत का असल मतलब यही है कि प्रभावित परिवार को सरकार उसकी पुरानी स्थिति के लायक बना दे। मगर सरकार की राहत मानकों में बंधी है, लिहाजा आपदा की जद में आने वाले परिवार के पास अपनी पुरानी स्थिति में लौटना नामुमकिन हो जाता है।
 
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नदी-नालों के किनारे निर्माण पर रोक क्यों नहीं?
-नदियों, नालों, खालों के किनारे भवनों के निर्माण पर अदालतों के फैसले तक लागू नहीं हो रहे हैं। आपदा के बार-बार झटके खाने के बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है। अभी सरकार यही सर्वे पूरा नहीं कर पाई है कि नदी तट पर बसी आबादी कितनी है और किस खतरनाक स्तर तक है?

कब लगेंगे डॉप्लर रडार? 
-पिछले एक दशक से मौसम पर निगेहबानी के लिए प्रदेश में डॉप्लर रडार लगाने के दावे हो रहे हैं। मगर राज्य और मौसम विभाग के मध्य समन्वय और फोकस न हो पाने की वजह से ये योजना भी अब तक खटाई में है। 
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