साल 2013 में केदारनाथ में जिसने तबाई मचाई अब वो ही बाबा के धाम को संवारने में काम आ रहे हैं। केदारनाथ धाम को पहले की तरह सौंदर्यीकरण करने के लिए दिन रात एक की जा रही है। पढ़िए किस तरह संवर रहा है केदारनाथ धाम...
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आपदा के दौरान केदारनाथ में तबाही मचाने वाले विशालकाय बोल्डर अब मंदिर को संवारने में इस्तेमाल हो रहे हैं। एएसआई के राजस्थान निवासी 17 कारीगर इन विशालकाय बोल्डरों को काटकर तराश रहे हैं, जो मंदिर और परिसर को मजबूती देने के साथ उसके सौंदर्य को भी निखार रहे हैं।
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तराशे गए ये पत्थर मजबूत होने के साथ-साथ मुलायम भी हैं। कारीगर अब तक इन बड़े बोल्डर से 500 से अधिक ब्लॉकनुमा और अन्य आकार के डिजाइनदार पत्थर तराश चुके हैं।
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16/17 जून 2013 को मंदाकिनी और सरस्वती नदी के सैलाब ने केदारनाथ धाम का भूगोल ही बदल दिया था। इस सैलाब के साथ केदारनाथ में चारों तरफ बड़े-बड़े बोल्डर आ गए थे जो आज भी यहां फैले हुए हैं।
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दो वर्ष से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इन्हीं बोल्डरों से मंदिर को मजबूत करने के साथ उसकी सुंदरता को बढ़ाने का काम कर रहा है। वर्ष 2015 से अब तक चरणबद्ध तरीके से एएसआई के 17 कारीगर (राजस्थान के कुम्हेरी और अर्जुनपुर गांव निवासी) धाम में मई से नवंबर तक विशालकाय बोल्डरों को काटकर ब्लॉकनुमा और अन्य डिजाइनदार आकार में तराश रहे हैं।
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कारीगर मुकेश, भवर लाल, मुन्ना, देशराज, राजपाल, शिवराज सहित अन्य कारीगर पहले पेंसिल से डिजाइन बनाकर पत्थर को आकार देते हैं और फिर छेनी और हथौड़े से इन्हें तराशते हैं। एक फीट लंबे, आधा फीट चौड़े पत्थर को तराशकर तैयार करने में कम से कम एक दिन लग जाता है।
अधीक्षण पुरातत्तविद देहरादून रीजन के एएसआई लिली धस्माना के मुताबिक केदारनाथ मंदिर को सुरक्षित और सुंदर बनाने के लिए मंदाकिनी नदी किनारे बोल्डरों को काटकर कटवा पत्थर तैयार किए जा रहा हैं। मंदिर में अब जो भी कार्य शेष हैं, उनमें तराशे गए इन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा।