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Kedarnath: गौरीकुंड...मंदाकिनी नदी के सैलाब ने गर्मकुंड को फिर बना दिया अतीत, मलबे में समाया पूरा कुंड क्षेत्र

Thu, 01 Aug 2024 09:57 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग)
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गौरीकुंड का गर्मकुंड क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
मंदाकिनी नदी के सैलाब ने गौरीकुंड स्थित गर्मकुंड को अतीत बना दिया है। 11 वर्ष पूर्व केदारनाथ आपदा से पूरी तरह से ध्वस्त हुए गर्मकुंड के अवशेष को जैसे-तैसे संरक्षित किया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के ठोस इंतजाम नहीं हो पाए जिस कारण यह धार्मिक धरोहर अतीत बन गई है। अब, बाबा के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु गर्मकुंड में स्नान नहीं कर पाएंगे। स्थानीय ग्रामीणों ने कुंड क्षेत्र में भरे मलबे की सफाई कर सुरक्षा की मांग की है।

केदारनाथ यात्रा के अंतिम बस्ती पड़ाव गौरीकुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। साथ ही यह क्षेत्र पूरी केदारनाथ यात्रा में सबसे बड़ा रोजगार का केंद्र भी है। यहां पर घोड़ा-खच्चर, डंडी-कंडी से जुड़े लोगों के साथ ही अन्य मजदूर काम करते हैं। जून 2013 की आपदा से पहले तक गौरीकुंड से ही केदारनाथ यात्रा का संचालन होता था, लेकिन आपदा के बाद से यह स्थान हाशिये पर सिमट गया।

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केदारनाथ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
मंदाकिनी नदी के उफान से यहां हुई व्यापक तबाही की चपेट में गौरीकुंड भी आया था। यहां गर्मकुंड पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था, बाद में जैसे-तैसे गर्म पानी को प्लास्टिक के पाइपों से संरक्षित किया गया। साथ ही शासन स्तर पर यहां गर्मकुंड को उसका मूल स्वरूप देने के लिए काम भी किए गए, लेकिन लाखों रुपये खर्च के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
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केदारनाथ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
यहां गर्म पानी को संरक्षित कर इसे दो अप्राकृतिक कुंडों में भरा जाने लगा, साथ ही पुरुष व महिला यात्रियों के लिए स्नानघर भी बनाया गया, लेकिन काम आधा-अधूरा होेने के कारण संचालन नहीं हो सका।

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केदारनाथ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
अब, बीते बुधवार की मूसलाधार बारिश से मंदाकिनी के उफान से गर्मकुंड क्षेत्र और अन्य निर्माण केंद्र मलबे में दब गए हैं। पूर्व ग्राम प्रधान मायाराम गोस्वामी, पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी, गौरी शंकर गोस्वामी आदि का कहना है कि केदारनाथ आपदा के बाद से गौरीकुंड की सुध नहीं ली गई।
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केदारघाटी में तबाही - फोटो : अमर उजाला
यहां पर मंदाकिनी नदी के तेज बहाव से सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं होने के कारण टनों मलबा भर चुका है। गौरी माई मंदिर परिसर और पित्र कुंड को भी खतरा पैदा हो गया है।
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