उत्तराखंड में एक गांव की नजर उतारने के लिए एक अजीब तरीका अपनाया जाता है। आप भी देखिए...
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गांव की नजर उतारने के लिए 'दूल्हे' को रस्सी पर टांगा
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पौड़ी के खिर्सू ब्लॉक के ग्वाड़ गांव में हर साल कठ्ठबद्दी मेले का आयोजन होता है। यह मेला हर वर्ष बैसाख माह के तीसरे सोमवार को आयोजित होता है। यह मेला एक साल कोठगी और दूसरे साल ग्वाड़ गांव में होता है। इस बार यह मेला ग्वाड़ गांव में हुआ।
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गांव की नजर उतारने के लिए 'दूल्हे' को रस्सी पर टांगा
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मेले के तहत रात को शुरू हुआ मंडाण अगले सूर्योदय तक जारी रहता है। सुबह लोग घंटाकर्ण देवता की पूजा करते हैं। उसके कठ्ठबद्दी की पूजा के साथ दूल्हे की तरह नहलाने के बाद गांव में भ्रमण कराया जाता है और रस्सी के सहारे गांव के ऊपर से ले जाया जाता है।
गांव की नजर उतारने के लिए 'दूल्हे' को रस्सी पर टांगा
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लकड़ी के इस दूल्हे को रस्सी के जरिये गांव के पंचायती चौक तक खिसकाया जाता है। कठ्ठबद्दी के इस रोमांच को देखने के लिए क्षेत्र के विभिन्न गांवों से लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। कठ्ठबद्दी पर लोगों द्वारा फूल एवं दाल-चावल अर्पित किए जाते हैं।
गांव की नजर उतारने के लिए 'दूल्हे' को रस्सी पर टांगा
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खिर्सू ब्लॉक में लगने वाले कठ्ठबद्दी मेले से एक दिन पहले ग्रामीण बुरांश की लकड़ी को तराशकर उसको मानव का आकार देते हैं। मेले के दिन पूजा के बाद उसे गांव के ऊपर करीब तीन सौ मीटर की ऊंचाई से रस्सी के सहारे पंचायती चौक तक खिसकाया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र को बुरी नजर से बचाने व खुशहाली के लिए यह मेला होता है।