करवाचौथ पर सुबह से शाम तक मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना का दौर चला। दोपहर बाद व्रती महिलाओं ने सामूहिक कथा और पूजा अर्चना की।
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- फोटो : अमर उजाला
व्रती महिलाओं ने रात आठ बजकर 18 मिनट पर चांद दिखते ही छलनी में दीपक रखकर छलनी से साजन का दीदार किया। उसके बाद अर्घ्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण किया।
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इससे पहले निर्जला व्रत रहीं महिलाएं शाम 7:30 बजे से ही परिवार के साथ छतों पर पहुंचकर चंद्रोदय का इंतजार करने लगीं। शाम के समय महिलाओं ने चौथ माई की कथा सुनी और आरती उतारकर अखंड सौभाग्य का वर मांगा।
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चौथ माई को मिठाई, चूरे बताशे, खील, खिलौने, चावल के आटे और दूध की मिठाई का भोग लगाया। विकासनगर स्थित गीता भवन और चकराता स्थित सनातन धर्म मंदिर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से चौथ माई की कथा सुनी।
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क्षेत्र के कई इलाकों में चांद के नजर आते ही बच्चों संग बड़ों ने आतिशबाजी भी की। सज-धज कर छतों पर एकत्र हुई महिलाओं ने मिट्टी के रंग-बिरंगे करवा और धातुओं के करवा से पूजन कर अर्घ्य दिया।
इससे पूर्व खरीददारी के लिए बाजार में भीड़ रही। ब्यूटी पार्लर भी गुलजार नजर आए। डॉ. पं. सुनील पैन्यूली ने बताया कि लोक मान्यता है कि करवे की टोटी से जाड़ा निकलता है। ऐसे में करवाचौथ के बाद ठंड में इजाफा होने लग जाता है।