कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) पर हर वर्ष शहादत देने वालों की वीरता को नमन किया जाता है, लेकिन दून में ही शहादत की उपेक्षा भी की जा रही है। शहीदों की स्मृतियों को जिंदा रखने के लिए जो शिलापट्ट, शहीद द्वार और सड़कों का नामकरण हुआ, उपेक्षित पड़े हुए हैं। कहीं शिलापट्ट गायब हैं, तो कहीं शहीद के नाम पर बनी सड़क की हालत खस्ता है। शहीद द्वारों पर भी राजनीतिक पार्टियों के बैनर टंगे हुए हैं।
कारगिल युद्ध में दून के 26 जांबाजों ने शहादत थी, जिनमें मेजर विवेक गुप्ता, स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर, राइफलमैन विजय भंडारी, नायक मेख गुरुंग, राइफलमैन जयदीप भंडारी, नरपाल सिंह, सिपाही राजेश गुरुंग, नायक हीरा सिंह, कश्मीर सिंह, देवेंद्र सिंह, शिवचराण आदि थे। इनकी स्मृतियों को जिंदा रखने के लिए तत्कालीन सरकार ने कई जगह शिलापट्ट लगाने के साथ ही चौक-चौराहों के नाम शहीदों के नाम पर रखे हैं। इसके अलावा कई जगह शहीद द्वार बनाए, लेकिन कई जगहों पर शहीदों के नाम के शिलापट्ट गायब हैं।