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Kainchi Dham: बाबा के दर पर आकर चमकी जुकरबर्ग सहित कई दिग्गजों की किस्मत, इन्हें मिला था पीएम बनने का आशीर्वाद

Thu, 15 Jun 2023 10:29 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल (हल्द्वानी)
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neem karoli baba - फोटो : Ishan Jain

कैंची धाम की स्थापना करने वाले बाबा नीम करोली महाराज के आशीर्वाद से कैसे स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों की किस्मत चमक गई इसे लेकर तमाम किस्से प्रचलित हैं। यह बिल्कुल सच है कि जिस भी व्यक्ति को देखकर अनायास ही बाबा ने कोई आशीर्वाद दिया, वह हमेशा पूरा जरूर हुआ भले ही उस समय यह हो पाना कितना ही कठिन या असंभव सा ही क्यों न प्रतीत होता रहा हो।

ऐसा ही एक वाकया है जब बाबा ने चौधरी चरण सिंह को वर्ष 1962-63 के दौरान देश का प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दे दिया था। इसी तरह उत्तराखंड के गृह सचिव रहे मंजुल कुमार जोशी को भी बाबा ने तब आईएएस बनने का आशीर्वाद दिया था जब वे सातवीं कक्षा के छात्र थे।

वर्ष 1962 में जब बाबा अल्मोड़ा मार्ग पर कैंची नामक जगह आए और उन्होंने यहां शिप्रा नदी के तट पर अपना आश्रम स्थापित करने की शुरुआत की तब उनके पास न तो धन या कोई साधन थे और न ही इसके लिए भूमि। अपनी धुन के पक्के बाबा ने यहीं आश्रम बनाना तय किया। इसके लिए भूमि प्राप्त करने को उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से भूमि उपलब्ध कराने को कहा लेकिन वांछित भूमि दे पाने में वन अधिकारी समर्थ नहीं थे।

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पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बाबा ने उनसे पूछा कि भूमि कैसे मिल सकती है तो उन्होंने कहा कि केवल वन मंत्री ही यह कार्य कर सकते हैं। बाबा ने कहा कि ठीक है उनसे ही मांग लेंगे। लोगों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब बाबा को उनके पास नहीं जाना पड़ा बल्कि चंद रोज बाद तत्कालीन कृषि और वन मंत्री चौधरी चरण सिंह स्वयं ही कैंची आ पहुंचे।
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kainchi dham - फोटो : अमर उजाला
बाबा की ओर से चरण सिंह से मंदिर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग पर चरण सिंह ने मंदिर के लिए एक रुपये की लीज पर वन विभाग की भूमि उपलब्ध कराई।

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कैंची धाम - फोटो : amar ujala
बाबा ने चरण सिंह को आशीर्वाद दिया कि वे एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। तब शायद स्वयं चरण सिंह ने भी इसकी कल्पना न की हो लेकिन बाद में 28 जुलाई 1979 को चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री बने और वे 14 जनवरी 1980 तक इस पद पर रहे।
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कैंची धाम - फोटो : amar ujala
इसी तरह उत्तराखंड में आईएएस अधिकारी रहे आध्यात्मिक प्रवृत्ति के विद्वान मंजुल कुमार जोशी को लेकर बाबा ने तभी उनके आईएएस बनने की घोषणा कर दी थी जब वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। मंजुल के परिवार का बाबा से गहरा लगाव रहा और उन्हें स्वयं भी बाबा का सानिध्य मिला।

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कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला
मंजुल कुमार जोशी जब सातवीं कक्षा के विद्यार्थी थे तो इलाहाबाद में एक मुलाकात के दौरान महाराज उन्हें देख कर अचानक बोल पड़े 'पीसीएस', आईसीएस'। यही नहीं बाबा ने इस बात को दोहराते हुए दोबारा भी कहा। बाबा जी का कहा 1980 में तब सच हो गया जब मंजुल कुमार जोशी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में वे आईएएस भी बने। मंजुल उत्तराखंड शासन में भी गृह सचिव सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने बाबा पर ''महाराज से मां तक'' जर्नी-महाराज टु मां किताब भी लिखी है।
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