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राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नड्डा की दो टूक, कहा - दीवारों पर नहीं, दिलों पर छाप छोड़ें

Fri, 15 Nov 2019 08:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की दो टूक
  • चरण वंदना और नारेबाजी से पार्टी में आगे बढ़ना संभव नहीं, व्यक्तिवादी नहीं संगठनवादी सोच बनाएं
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- फोटो : अमर उजाला
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि दीवारों पर नहीं हमें लोगों के दिलों में छाप छोड़नी होगी। सियासत का अंदाज बदल गया है। पार्टी में चरण वंदना और नारेबाजी से आगे बढ़ना संभव नहीं है। जो व्यक्तिवादी राजनीति करेगा, वो अलग-थलग पड़ जाएगा। सभी को संगठनवादी सोच बनानी होगी। नड्डा ने ये नसीहत पार्टी पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों की बैठकों में दी। 
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राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वे उत्तराखंड में पहली बार पार्टी नेताओं से संवाद कर रहे थे। हालांकि उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड मेरे लिए नया नहीं हैं, मैं चुनाव प्रभारी रहा और यहां बैठे एक-एक चेहरे को पहचानता हूं।’ करीब एक घंटे का उनका संबोधन सांगठनिक गतिविधियों और उनके संचालन में पार्टी नेताओं की सक्रिय भूमिका पर केंद्रित रहा। इससे पूर्व पार्टी कार्यालय में पहुंचने पर प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश संगठन महामंत्री अजय कुमार व प्रदेश महामंत्री खजानदास ने उनका स्वागत किया।
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नड्डा एक खुले वाहन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, मेयर सुनील उनियाल गामा के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश और आंध्रप्रदेश के पूर्व संगठन महामंत्री गोविंद राजू भी नड्डा के साथ देहरादून पहुंचे थे। अपने भाषण में नड्डा ने कुछ खास बातें कहीं, जो इस तरह हैं।
 

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नड्डा ने पार्टी में विभिन्न पदों पर बैठे नेताओं को साफ कर दिया कि जिम्मेदारी मिली है तो परफार्म भी करना होगा। हर नेता और कार्यकर्ता संगठन की निगेहबानी में है। पद एक जिम्मेदारी है, इसलिए जिस समय ये दायित्व मिलता है, उस पर अपना श्रेष्ठतम देने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि कोई किसी का कितना भी करीबी क्यों न हो, अब बगैर परफारमेंस के आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा कि नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर इस ढंग से काम करना चाहिए कि छाप छूट जाए। जब आप पद पर भी नहीं रहें, तब भी याद किए जाएं। क्योंकि पद अस्थायी है, लेकिन इम्पैक्ट स्थायी है। पद तो आते जाते हैं। आज हम पदों पर हैं, कल पूर्व हो जाएंगे।
 
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उन्होंने कहा कि हर नेता और कार्यकर्ता को अपना इंटरनल ऑडिट करना चाहिए। अपनी खूबियों को ही नहीं, कमजोरियों को भी पहचानने की कोशिश करें। उन्हें ठीक करें। उन्होंने समय प्रबंधन की भी सीख दी। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया कि उनकी उनकी दिनचर्या सुबह तड़के शुरू हो जाती है और हर वक्त वे पूरी तैयारी से होते हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम समय में अधिक से अधिक डिलीवरी देने की आदत बनाएं।
 
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नड्डा ने व्यक्तिवादी सियासत पर तंज किया। उन्होंने कहा कि जो एकला चलेगा, वो पीछे छूट जाएगा। सबको साथ लेकर चलें। जो लोग एक व्यक्ति के जिंदाबाद तक सीमित रहते हैं, वे पार्टी में विभाजन की तरह देखे जाते हैं। व्यक्तिवादी नहीं संगठनवादी बनें। उन्होंने साफ किया कि अब पार्टी इतना बड़ी और प्रभावी हो गई है कि उसके लिए क्वालिटी और टैलेंट को पहचानना मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि जो निष्ठावान, योग्य और पार्टी की मजबूती के लिए उपयोगी हैं, उन्हें आगे बढ़ने से न रोकें। काबिल लोगों को आगे आने दें। 
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उन्होंने पोस्टर और बैनर की सियासत पर भी तंज किया। उन्होंने कहा कि समय समाज और लोगों के दिलों में जगह बनाने का है। हर नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाए और सामाजिक सक्रियता के माध्यम से उनके दिलों में स्थान बनाए। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के हितों के लिए धरना प्रदर्शन करती है। लेकिन ये कार्यक्रम पार्टी के बनकर रह जाते हैं। धरना, प्रदर्शन और कार्यक्रम करने वाले एक ही तरह के चेहरे होते हैं, जो उचित नहीं हैं। उन्होंने सलाह दी कि पार्टी के हर कार्यक्रम में कम से कम पांच नए चेहरों को शामिल होना चाहिए। इसके लिए पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता कार्ययोजना तैयार करें।

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नड्डा ने कहा कि आज पार्टी जहां है, उसके पीछे बुजुर्ग नेताओं और कार्यकर्ताओं का परिश्रम व मेहनत हैं। उन्होंने पदों की लालसा नहीं की। पार्टी के हर नेता और कार्यकर्ता का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे बुजुर्ग नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर जाकर उनकी कुशलक्षेम लें और उन्हें पूरा सम्मान दें। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों को भी नसीहत दी कि वे खुद को भाजपा नेता के तौर पर ही न पहचाने, बल्कि उनकी पहली पहचान मोर्चा नेता के तौर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये पहचान उनकी तब बनेगी, जब वे मोर्चे से संबंधित वर्ग के हितों पर पूरी सक्रियता के साथ काम करेंगे। जब तक वे उनके मुद्दों लेकर उनके मध्य नहीं जाएंगे, उनकी यह पहचान नहीं बन पाएगी।
 
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भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पार्टी में मेहनत और लगन से कार्य करने वालों को पूरा मान और सम्मान मिलता है। अपने इस कथन के पक्ष में उन्होंने एक वाकया सुनाया। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पहले जब वे युवा मोर्चा के नेता थे, तो उत्तराखंड आए थे। तब प्रेमचंद अग्रवाल डीएवी पीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे थे। प्रेमचंद अग्रवाल ने मेरी मुलाकात त्रिवेंद्र सिंह रावत से कराई। तब त्रिवेंद्र जी प्रचारक थे। उन्होंने मेरा एक भाषण डीएवी कालेज में कराया। आज कई वर्षों के बाद त्रिवेंद्र जी मुख्यमंत्री हैं, मैं पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष हूं और प्रेमचंद स्पीकर हैं। पार्टी में जो लोग लगन और मेहनत से काम करते हैं, उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। 
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