हरी भरी वादियों के बीच बसे जोशीमठ की पथरीली जमीन और पहाड़ के किनारों से जिस तरह पानी का रिसाव हो रहा है ठीक वैसा ही रिसाव एनटीपीसी की तपोवन टनल के नीचे देख विशेषज्ञ चौंक गए। जोशीमठ से करीब 18 किमी. दूर इस टनल के बाहर यह रिसाव ऋषिगंगा नदी के मुहाने पर हो रहा है। रिसाव का पानी टनल का है।
हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिकों ने पानी के नमूने ले लिए हैं। अब वे दोनों जगह के नमूनों के सिग्नेचर का मिलान करेंगे। इससे पता चलेगा कि जोशीमठ में रिसाव का इस टनल से कोई कनेक्शन है या नहीं। जोशीमठ में तेजी से हो रहे भू-धंसाव के पीछे स्थानीय लोग एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की टनल निर्माण को जिम्मेदार मान रहे हैं।
उनका यह भी आरोप है कि टनल की वजह से ही पानी उनके घरों तक पहुंच गया है। जोशीमठ के लोगों के टनल की वजह से भू-धंसाव के आरोपों से एक सप्ताह में पर्दा हट जाएगा। रुड़की के राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कृष्ण, ने बीते दो दिन जोशीमठ, टनल और दोनों के बीच दो अन्य रिसावों के सैंपल एकत्र किए।