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Joshimath: शहर में सीवर लाइनें न होने से नुकसान, 47 साल से जोशीमठ का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों की रिपोर्ट

Sun, 15 Jan 2023 03:16 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/जोशीमठ
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जोशीमठ भू-धंसाव: फिर बढ़ा जेपी कॉलोनी के पीछे जलस्त्रोत का पानी। - फोटो : अमर उजाला
पिछले 47 साल से जोशीमठ का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक शहर में सीवर लाइनें न होने के नुकसान बता रहे हैं। अब तक जितनी भी रिपोर्ट आईं, सभी में इस पर जोर दिया गया, लेकिन सरकारों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।
दो साल पहले पेयजल निगम ने जो 100 करोड़ रुपये से ऊपर का प्रस्ताव बनाया था, वह फाइलों में कैद होकर रह गया।

जोशीमठ के लिए पेयजल निगम ने दो साल पहले सीवर लाइनें बिछाने के लिए करीब 100 करोड़ का प्रस्ताव बनाया था। प्रस्ताव नमामि गंगे को भेजा गया था। तब नमामि गंगे ने केवल दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृति दी थी, जो शुरू हो चुके हैं। सीवर नेटवर्क का प्रावधान इस योजना में न होने का हवाला दिया गया था। लिहाजा, यह प्रस्ताव फाइलों में ही धूल फांकता रह गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार समय से सीवर नेटवर्क बिछा देती, तो जोशीमठ के शायद आज ये हालात न होते।

47 साल से चेता रहे हैं वैज्ञानिक
सबसे पहले 1976 में मिश्रा कमेटी ने जोशीमठ की जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, उसमें इस शहर में सीवर नेटवर्क की जरूरत बताई थीं। इसके बाद 2010 में एमपीएस बिष्ट की रिपोर्ट में भी इस बात पर जोर दिया गया था। पिछले साल जुलाई में गढ़वाल विवि के पांच प्रोफेसर ने अपनी रिपोर्ट में सीवर नेटवर्क पर जोर दिया। नवंबर 2020 में आई डॉ. पीयूष रौतेला की रिपोर्ट में भी सीवर नेटवर्क को जरूरी करार दिया गया। 
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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
केंद्र की इमदाद पर ही निर्भर है राज्य
जोशीमठ हो या अन्य शहर, राज्य सरकार यहां सीवर नेटवर्क लगाने, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने जैसे कार्यों के लिए केंद्र सरकार पर ही निर्भर है। पेयजल विभाग सीवर लाइन बिछाने का काम करता है, जिसका सालभर का बजट ही करीब 200 करोड़ होता है। ऐसे में 100 या 200 करोड़ की सीवर लाइन बिछाना कैसे संभव होगा। लिहाजा, राज्य सरकार ज्यादातर केंद्रीय इमदाद से ही सीवर बिछाने पर फोकस करती है।
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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले पेयजल विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर नमामि गंगे को भेजा था। नमामि गंगे के नियमों में सीवर नेटवर्क का प्रावधान नहीं था। लिहाजा, केवल दो एसटीपी ही बन पाए थे, जो शुरू हो चुके हैं। 
-उदयराज सिंह, एमडी, पेयजल निगम

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शिवलिंग में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
बजट के अभाव में जमीन में सालों से समा रहा सीवर
जोशीमठ में सीवर लाइनें बिछाने, पानी की निकासी की योजना के लिए प्रस्ताव तो बने, लेकिन बजट के अभाव में योजना परवान नहीं चढ़ पाई। नतीजतन वर्षों से जोशीमठ की जमीन में सीवर समा रहा है।
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जोशीमठ में दरक रहा पहाड़ - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय स्तर पर दो बार बना प्रस्ताव
2019 में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से केंद्र सरकार को जोशीमठ में सीवर कार्यों के लिए 78 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा, लेकिन बजट नहीं मिल पाया। 2020 में शासन को 32 करोड़ का प्रस्ताव फिर भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
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जोशीमठ भू-धंसाव - फोटो : अमर उजाला
पालिका ने नालियां बनाई, पर पानी जमीन में ही गया
जोशीमठ में आज तक जल निकासी की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नगर पालिका जोशीमठ ने वार्डों में पैदल रास्तों के किनारे नालियां जरूर बनवाईं, लेकिन पानी का समाधान नहीं किया गया। जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था न होने से वह पानी भी जमीन में समा रहा है। 
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जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग तैयार कर रहा जल निकासी का प्रस्ताव
अब भू-धंसाव के बाद नगर में जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था के लिए सिंचाई विभाग गोपेश्वर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। अधिशासी अभियंता अनूप कुमार ने बताया, जोशीमठ की जल निकासी के लिए 80 करोड़ की डीपीआर तैयार की जा रही, जो जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी।

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जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ : सीवर का 202 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा
भू-धंसाव के बीच पेयजल निगम ने शनिवार को जोशीमठ सीवर परियोजना का 202 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेजा जाएगा। हाल ही में सरकार ने पेयजल निगम को जोशीमठ में सीवर लाइनें बिछाने का प्रस्ताव बनाने को कहा था। निगम एमडी उदयराज सिंह ने बताया, करीब 202 करोड़ की डीपीआर शासन में आ चुकी है। इस पर शासन स्तर से जांच पड़ताल की जाएगी। इस प्रस्ताव में एक ही सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के बजाए तीन से चार जगह सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर अलग-अलग मोहल्लों से वहां सीवर लाइन को कनेक्ट करने की योजना है। बताया, इस प्रस्ताव को नमामि गंगे के अलावा राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजा जाएगा। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद ही काम होगा। इससे पहले पेयजल निगम की ओर से यहां की भूमि की जांच कराई जाएगी।

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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
राहत पैकेज में शामिल हो सकता है प्रस्ताव
राज्य सरकार की ओर से जोशीमठ के लिए केंद्र से राहत पैकेज मांगने की तैयारी की जा रही है। जोशीमठ का 202 करोड़ का सीवर लाइनों का प्रस्ताव भी इसी पैकेज का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, अभी सरकार को इस पर निर्णय लेना है।

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जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
तीन और शहरों में सीवर की बनेगी डीपीआर
पेयजल निगम ने जोशीमठ की डीपीआर शासन को भेजने के बाद अब उत्तरकाशी, कर्णप्रयाग और गोपेश्वर में भी सीवर लाइनें बिछाने के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। निगम के एमडी उदयराज सिंह का कहना है कि अगर केंद्र अपनी योजना में कोई बदलाव करता है तो सरकार इन शहरों की डीपीआर भी केंद्र को भेजेगा। फिलहाल पूर्व में ही डीपीआर तैयार कराई जा रही है।
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