चीन सीमा से लगा देश का सीमांत नगर जोशीमठ भू-धंसाव की जद में है। सरकार ने यहां अधिकारियों का लावा-लश्कर तैनात किया हुुआ है। प्रभावित 900 से अधिक लोग राहत शिविरों में दिन काट रहे हें। लेकिन, अभी तक कागजी पैमाना ही तय नहीं हो पाया है कि जोशीमठ का भविष्य क्या होगा।
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती का दो टूक कहना है कि नगर को इस हाल में पहुंचाने के लिए सरकारें ही सबसे बड़ी जिम्मेदार हैं। आपदा प्रभावित जोशीमठ को लेकर उनसे हमने विस्तृत बातचीत की गई। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...
प्रश्नः आप पर आरोप लग रहे हैं, आप जोशीमठ के मुद्दे पर लोगों को भड़का रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी कहा वामपंथी लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
उत्तरः चीन के साथ पींगे तुम बढ़ाओ, व्यापार तुम बढ़ाओ, चीन को बड़े बड़े ठेके देकर पुल तुम बनवाओ और एजेंट हम कहलाएं, ये कहां का इंसाफ है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का बयान सरकार के नकारेपर का उदाहरण है। पिछले दिनों वह (महेंद्र भट्ट) जोशीमठ के मुद्दे पर हमें मुख्यमंत्री से मिलवाने ले गए थे, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, उस दिन हम देशी थे या चीनी एजेंट। जोशीमठ की प्रभावित जनता बेहद दर्द में है और सरकार और भाजपा संगठन के लोग ऊलजलूल बयानबाजी कर रहे हैं।