शुक्रवार को ऐतिहासिक झंडे जी के आरोहण के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्घालुओं की उपस्थिति में झंडे जी का आरोहरण किया गया। शावा-शावा नी देखो झंडा चढ़दा जैसे जयकारों के बीच शाम चार बजकर दस मिनट पर झंडे जी का आरोहण हुआ।
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- फोटो : amar ujala
झंडे जी का आरोहण होते ही झंडे बाजार के आसपास के सभी व्यापारी अपनी-अपनी दुकान के सामने ही नतमस्तक हो गए। उन्होंने दूर से ही झंडे जी को प्रणाम किया। वहीं झंडे जी की परिक्रमा करने वाला बाज, द्रोण और गुब्बारे इस दौरान आकर्षण का केंद्र रहे।
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शुक्रवार को झंडे जी के आरोहण के साथ ही विधिवत मेले की शुरुआत हो गई। इस दौरान सुबह आठ बजे से ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। सबसे पहले झंडे जी का दूध, दही, शहद आदि से विशेष अभिषेक किया गया। पुराने गिलाफ उतारे गए।
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इसके पश्चात सबसे पहले सूती फिर शनील और अंत में दर्शनी गिलाफ चढ़ाए गए। शाम 3.45 बजे से झंडे जी का आरोहण शुरू हो गया था। इससे पहले महंत श्री देवेंद्र दास महाराज झंडे आरोहण के लिए संगत के बीच पहुंचे तो संगत उनके दर्शनों को उमड़ पड़ी।
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हर किसी ने महाराज के पैर छुए। महाराज ने सबको झंडा आरोहण में सहयोग करने का इशारा किया। इसके बाद वह झंडे जी के समीप पहुंचे। जहां इशारों से झंडे जी के आरोहण की पूरी प्रक्रिया बताई।
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झंडे जी का आरोहण होते हुए आसमान में रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ने लगे। बाज ने झंडे जी की तीन बार परिक्रमा की। द्रोण से पूरी फोटोग्राफी की गई।
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दरबार साहिब के इतिहास में कई सालों बाद ऐसा हुआ कि किसी बनिया परिवार ने दर्शनी गिलाफ चढ़ाया। वैसे तो दरबार साहिब पर हर जाति, धर्म के लोगों की आस्था है। लेकिन अधिकतर सिख और पंजाबी परिवारों ने ही अब तक यहां दर्शनी गिलाफ चढ़ाया है।
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हरियाणा के साबत गांव से आए आशीष कुमार गोयल और उनके परिवार ने बताया कि वैसे तो उनकी बारी अगले साल आनी थी लेकिन इस बार जिस परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाना था, उन्होंने अगली बार आने को कहा तो हम इस बार के लिए सहमत हो गए।
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सप्तमी यानी रविवार को दरबार साहिब से नगर परिक्रमा निकलेगी। परिक्रमा की शुरुआत सुबह साढ़े नौ बजे झंडे जी से होगी। यहां से परिक्रमा सहारनपुर चौक, कांवली रोड, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बिंदाल पहुंचेगी।
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जहां आधा घंटा रुकने के पश्चात तिलक रोड, घंटाघर, गांधी रोड, रीठा मंडी होते हुए श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल भंडारी बाग में विश्राम करेगी।
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यहां महंतों की समाधि स्थल लक्खीबाग पहुंचकर आधा घंआ रूकने के पश्चात करीब दो बजे दरबार साहिब पहुंचकर संपन्न होगी। इस दिन शाम चार बजे पैदल संगत एवं पंजाब के महंत, मसंदों को पगड़ी, प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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जयपुर से आई सविता वेदी ने बताया कि बेटे हरमन के मुंडन के लिए झंडे जी आए हैं। बताया कि वह पहली बार झंडे जी के दर्शन को पहुंची हैं। उन्होंने दून में रहने वाली रिश्तेदार रविंद्र कौर से बेटे के मुंडन की बात कही तो उन्होंने दरबार साहिब की मान्यता बताई।
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सुभाष नगर निवासी मंजीत कौर अपनी बहू संगीता और बहन नीलम के साथ झंडे जी के दर्शन को पहुंची। मंजीत ने बताया कि बहू की शादी को अभी एक साल होने को है तो बहू को अपनी परंपरा के बारे में बताया और यहां लेकर आई।
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दिल्ली से पहुंची उर्मिल ने बताया कि वह दस सालों से झंडे जी दर्शन को आ रही है। कहा कि यहां जो भी मन्नत मांगी हर बार पूरी हुई। उनकी आस्था हर बार ही झंडे जी पर बढ़ी है। वह सभी लोगों से यहां दर्शन को आने को कहती है।
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गांधी रोड निवासी संगीता गुप्ता ने बताया कि दरबार साहिब में हर मन्नत पूरी हुई है। कहा कि हम तीन बहनें हैं। हमारी इच्छा थी कि एक भाई हो। हमने दरबार साहिब में मन्नत मांगी एक भाई भी मिल गया था, तबसे विश्वास बढ़ गया।
लक्खीबाग निवासी प्रेमलता मित्तल ने बताया कि वह पचास सालों से झंडे जी के दर्शनों को पहुंच रही है। बताया कि दिन-प्रतिदिन संगत बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही लोगों का विश्वास भी बढ़ रहा है। यहां आने वालों की सभी मन्नत पूरी होती है।