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84 साल की उम्र में ऑटो चलाकर गुजारा कर रहे थे क्रिकेटर बुमराह के दादा, तस्वीरें देख आंखे छलक आएंगी

Mon, 11 Dec 2017 10:40 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज व करोड़पति क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के दादा संतोख नागपाल अपना गुजारा ऑटो चलाकर करते थे।
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बता दें कि,  जसप्रीत बुमराह के दादा जी संतोक सिंह बुमराह का शव रविवार को साबरमती नदी से बरामद किया गया है। अहमदाबाद दमकल विभाग को गांधी ब्रिज और दधीची ब्रिज के बीच से संतोक सिंह की लाश मिली। 84 वर्षीय संतोक अपने पोते जसप्रीत से मिलने के लिए अहमदाबाद गए थे।
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संतोक सिंह बुमराह
अहमदाबाद के बड़े इंडस्ट्रियलों में शुमार संतोख सिंह बुमराह इन दिनों उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के छोटे से कस्बे किच्छा में ऑटो चलाकर कर अपनी और अपने छोटे पोलियोग्रस्त बेटे की रोजी चला रहे थे। संतोख सिंह बुमराह आजकल बुढ़ापे में किच्छा में किराये के टूटे-फूटे कमरे में रह कर मुफलिसी की ज़िन्दगी काट रहे थे।

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कभी गुजरात के अहमदाबाद मे बटवा इंडस्ट्रियल स्टेट में संतोख सिंह बुमराह का जलवा हुआ करता था। वो लग्ज़री कारों और प्लेन में सफर किया करते थे। सारा कारोबार क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के पिता जसवीर सिंह बुमराह संभालते थे।
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2001 में बेटे की बीमारी से मौत से संतोख सिंह टूट गए और फैक्ट्रियां भी आर्थिक संकट से घिर गई। बैंको का कर्ज़ा निबटाने के लिये उन्हें तीनो फेक्ट्रियों को बेचना पड़ा। उनकी शानदार ज़िन्दगी एक दम से ज़मीन पर आ गई।
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जसप्रीत बुमराह - फोटो : The Quint
पने सुनहरे दिनों की याद करते करते संतोख सिंह की बूढी आँखो मे आंसू छलक आते है। हालांकि ज़िन्दगी की आखरी दहलीज़ पर पहुंचे 84 साल के बुज़ुर्ग संतोख सिंह बुमराह को अपनी मुफ़लिस ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं है, वो इसे सब कुदरत का खेल मानते है। लेकिन उनका पोता आज देश का बड़ा क्रिकेटर बन गया है। जब वो अपने पोते जसप्रीत बुमराह को टी वी स्क्रीन पर तेज़ गेंदबाज़ी करते देखते है, तो उनमें जवानी का जोश भर जाता है।
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बुमराह - फोटो : getty
बूढ़े हो गए संतोख सिंह ने अपने पोते जसप्रीत बुमराह के बचपन की फोटो बहुत सहेज कर रखी है। वो अपने पोते से मिलने के लिये छटपटा रहे थे। संतोख सिंह का कहना था कि जीवन के आखरी पड़ाव में पोते को गले लगा कर उसे प्यार करने की तमन्ना है, वो उसे छू कर आशीर्वाद देना चाहते है। वो मीडिया के जरिए पोते से मिलने का संदेश अपने पोते तक पहुंचाना चाहते हैं।
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