फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शादी में आने से पहले ही तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शहीद राकेश का शव, तस्वीरें देख आंखे भर आएंगी

Wed, 14 Feb 2018 07:46 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 7
rakesh chandra
एक हफ्ते बाद राकेश चंद्र रतूड़ी को घर लौटना था। घर आने का वादा तो किया, लेकिन तिरंगे में लिपटकर जब उसका शव घर पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया।

 
विज्ञापन

2 of 7
rakesh chandra
शहीद राकेश का पार्थिव शरीर शाम करीब सात बजे घर पहुंच गया। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर आर्मी की तरफ से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से वाहनों से घर तक पहुंचा। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। जहां पत्नी बार-बार बेसुध हो रही थीं, वहीं बच्चे राकेश से चिपटकर बिलखने लगे। गमगीन नजारा देख मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें छलक उठीं। वहीं इस दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राकेश तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी खूब गूंजे।

 
विज्ञापन

3 of 7
rakesh chandra
घर पहुंचने से आठ दिन पहले हवलदार राकेश चंद्र की मौत की खबर आ गई। राकेश, 22 फरवरी को भतीजी की शामिल होने के लिए दून आने वाले थे। परिवार में शादी की तैयारियां जोरों पर थी। राकेश हर दिन फोन करके शादी के लिए हो रही खरीदारी की जानकारी लेते थे लेकिन परिजनों का कहना है कि तीन दिन से उनका कोई फोन नहीं आया था।

 

4 of 7
rakesh chandra
पूरे परिवार का दिल बेचैन था। आखिर मंगलवार की सुबह अचानक राकेश के जम्मू के सुंजवां में फिदायीन हमले में शहीद होने की खबर आई। हमले के बाद चले सेना के सबसे लंबे सर्च ऑपरेशन के दौरान हवलदार राकेश का शव मिला। यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी और बच्चे अवाक रह गए। परिवार और नाते-रिश्तेदारों में शादी की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।
विज्ञापन

5 of 7
rakesh chandra
राकेश चंद्र रतूड़ी बेहद मिलनसार और खुशमिजाज थे। वे 22 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे। अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग रहने के बाद भी उन्होंने गांव और नाते-रिश्तेदारों से नजदीकियां बनाए रखीं। वे हर किसी के सुखदुख में शामिल होते थे। राकेश इसी साल दो जनवरी को घर आए थे।

 
विज्ञापन

6 of 7
rakesh chandra family
 एक सप्ताह की छुट्टी के बाद नौ जनवरी को लौट गए थे। फरवरी में ही उनकी पदोन्नति नायब सूबेदार पद पर हुई। उन्हें इसी महीने में अपनी नई पोस्टिंग पर लद्दाख जाना था। 22 फरवरी को उनके भाई जगदीश रतूड़ी की बेटी की शादी है। शादी में शामिल होने राकेश को देहरादून आना था। उन्होंने हरहाल में शादी में पहुंचने का वादा किया था। इसके बाद ही लद्दाख में ज्वाइनिंग करनी थी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
rakesh chandra
परिजनों के मुताबिक राकेश रोजाना फोन करते थे। शादी की खरीदारी और तैयारियों के बारे में पूछते थे। शनिवार से उनका फोन आना बंद हो गया। राकेश के बड़े भाई रेवती नंदन रतूड़ी ने बताया कि सोमवार को यूनिट में ही तैनात राकेश के एक साथी का फोन आया। साथी ने राकेश के शहीद होने की खबर दी। इस पर चाचा शेखरानंद रतूड़ी ने यूनिट में फोन किया और मेजर खान से बात की। मेजर ने राकेश के शहीद होने की पुष्टि की। राकेश चंद्र रतूड़ी के शहीद होने की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव से नाते रिश्तेदार पहुंचने शुरू हो गए। मंगलवार को उनके आवास में सांत्वना देने वालों की भीड़ रही।



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें