चारधाम यात्रा 2017 के लिए बुधवार को केदारनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए। भगवान शिव के धाम में कुछ ऐसे चमत्कार हुए हैं जिन्हें देखकर आज भी लोग सकते में हैं। 2013 में 16-17 जून को आई आपदा के वक्त जब पूरा उत्तराखंड तबाही का दंश झेल रहा था, तभी केदारनाथ धाम के कई चमत्कार भी हुए। जिसे देख लोग आश्चर्य में पड़ गए थे।
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special photo gallery on kedarnath disaster
जब केदारनाथ मंदिर के पीछे से जल प्रलय के साथ मलबे में बड़े-बड़े बोल्डर और पत्थर आए तो एक चमत्कार हुआ। एक बड़ी चट्टान मंदिर के पीछे उस पानी के साथ आई और मंदिर के थोड़ी सी पीछे रुक गई। जब पानी और मलबे का बहाव आया तो उस चट्टान ने बहाव दो तरफ मोड़ दिया और मंदिर को आंच तक नहीं आने दी। जिसके बाद इसका नाम भीम शिला रख दिया गया।
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गांधी सरोवर से आए सैलाब की रफ्तार का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि केदारनाथ मंदिर के बाहर लगे लोहे का बैरिकैटर टेढ़ा मेढ़ा हो गया। मंदिर का चबूतरा तक ध्वस्त हो चुका है। लेकिन वही सैलाब आस्था की सबसे बड़ी नींव यानी केदारनाथ मंदिर को हिलाने में नाकामयाब रहा।
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केदारनाथ
सैलाब के बाद एक टीवी चैनल ने मंदिर के अंदर का दृश्य दिखाया था। इस दृश्य में मंदिर के अंदर सैलाब ने जो तबाही फैलाई थी उसके निशान भी दिख रहे थे।
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kedarnath
शंकराचार्य की मूर्ति को क्षति पहुंची थी। लेकिन मंदिर के अंदर मौजूद नंदी की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।मंदिर के बाहर स्थित नंदी की प्रतिमा भी सुरक्षित थी।
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केदारनाथ
ताज्जुब की बात तो यह थी कि 16 जून 2013 तारीख से काफी महीनों तक मंदिर में शिवलिंग की पूजा नहीं हुई थी फिर भी शिवलिंग पर बेलपत्र मौजूद था। शिवलिंग का आधा भाग मलवे में इस तरह दबा था कि मानो शिव समाधि में लीन बैठे हों।
मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1076 से 1099 तक राज करने वाले मालवा के राजा भोज ने बनवाया था। बताया जाता है कि मौजूदा केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे पांडवों ने एक मंदिर बनवाया था, लेकिन वह मंदिर वक्त के थपेड़ों की मार नहीं झेल सका।