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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: 25 साल में दुनिया के कोने-कोने तक ऐसे पहुंची बाबा रामदेव की योग यात्रा

Sun, 21 Jun 2020 12:26 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : अमर उजाला
योग गुरु स्वामी रामदेव की योग यात्रा 25 साल में दुनिया के अधिकांश देशों तक पहुंच गई। इतने कम समय में बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कीं। उनके प्रयासों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से योग को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का दर्जा मिला। 

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वर्ष 2001 में दिव्य योग मंदिर कनखल से निकलकर स्वामी रामदेव ने योग शिविरों की जो श्रृंखला ज्वालापुर के पांडेवाला मैदान से शुरू की थी, उसकी पहुंच आज देश से बाहर निकलकर विश्व के कोने-कोने तक पहुंच गई है।
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स्वामी रामदेव हिमालय से आकर वर्ष 1995 में हरिद्वार पहुंचे। यहां कनखल में पहले उदासियों के बड़े अखाड़े और बाद में स्थायी रूप से कृपालु बाग आश्रम में योग साधना शुरू की। इसमें उनके साथ आचार्य बालकृष्ण का योगदान भी बराबर का रहा। दोनों संतों ने मिलकर योग को अंतरराष्ट्रीय ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 

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- फोटो : अमर उजाला
स्वामी रामदेव के प्रयासों से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा। दुनिया के 193 देशों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव का समर्थन किया। 
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भारत से पतंजलि ऋषि द्वारा प्रतिपादित योग वैसे तो अनेक योगियों के माध्यम से पहले ही दुनिया के कई देशों में जाकर योगा बन गया, लेकिन यह स्वामी रामदेव का ही प्रभाव है कि योगा को फिर से योग का दर्जा मिला। 
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स्वामी रामदेव ने कृपालु बाग को दिव्य योग मंदिर का स्वरूप प्रदान किया। रामदेव और बालकृष्ण ने मिलकर आयुर्वेदिक औषधियों को नये कलेवर में छोटे स्तर पर प्रारंभ किया। आज बाबा का योग और प्राणायाम से जुड़ा प्रतिष्ठान मीलों की दूरी में फैला हुआ है। योगग्राम यौगिक साधना का अनूठा केंद्र बन चुका है। 
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