आतंकवाद के खिलाफ रानीखेत के चौबटिया में चल रहा भारत व अमेरिकी सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास मंगलवार को समाप्त हो गया। इस मौके पर गरुड़ा मैदान में भव्य परेड का आयोजन किया गया। समापन में भारतीय मूल के अमेरिकी सैनिक आकर्षण का केंद्र रहे।
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- फोटो : AmarUjala
दोनों देशों के कमांडिंग आफिसरों ने परेड का संयुक्त निरीक्षण किया। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि युद्धाभ्यास से जहां दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ होंगे, वहीं आतंकी गतिविधियों के खिलाफ मुहिम चलाने में भी सफलता मिलेगी।
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14 दिनों तक साथ युद्धाभ्यास करने के बाद समापन अवसर पर दोनों देशों की सेनाओं के जवान और अधिकारी गर्मजोशी से मिले। युद्धाभ्यास के दौरान गुजरे अनुभवों को याद किया गया।
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दो हफ्ते में ही दोनों देश के अधिकारी और जवान आपस में पूरी तरह से घुल मिल गए थे। एक दूसरे देशों की संस्कृति से भी रूबरू हुए।
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इस दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी सैनिक चर्चा में बने रहे। गौरतलब है कि युद्धाभ्यास में अमेरिका सेना में कई भारतीय मूल के सैनिक पहुंचे थे।
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भारत व अमेरिकी सैनिकों का 12वां संयुक्त युद्धाभ्यास 14 सितंबर को शुरू हुआ था। अमेरिकी सैन्य दल का प्रतिनिधित्व 5वीं इंफेंट्री बटालियन, 20 इंफेंट्री रेजीमेंट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कांबेट टीम, 7 इंफेंट्री डिव और भारतीय दल का प्रतिनिधित्व कांगो ब्रिगेड कर रही थी।
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युद्धाभ्यास के दौरान आतंकवाद और विद्रोह के खात्मे के लिए दोनों देशों के जवानों और अधिकारियों ने साझा रणनीति पर काम किया। जमीनी युद्ध की बारीकियां सीखीं। तकनीकी युद्ध कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया। सेनाओं को संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के अभियानों के दौरान मिलने वाली दुश्मनों की धमकियों को विफल करने की योजना बताई गई।
समापन अवसर पर दोनों देशों के जवानों को संबोधित करते हुए मेजर जनरल आरके रैना और मेजर जनरल थामस जेम्स ने कहा कि युद्धाभ्यास के तहत दोनों देशों की सेनाओं ने शारीरिक परीक्षण के साथ, फायरिंग, ड्रिल और तकनीकी कौशल के अनुभव साझा किए हैं। अकादमिक परिचर्चा में दोनों देशों के अनुभवी विशेषज्ञों ने तमाम युद्ध कौशल की बारीकियां बताई हैं।