फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश के आखिरी गांव में कुछ इस तरह होती है आजादी की धूम, तस्वीरें

Tue, 16 Aug 2016 07:59 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 5
independence day celebration in india last village niti
देश के अंतिम गांव नीति घाटी में आजादी का जश्न आज भी ठीक उसी तरह से मनाया जाता है जैसे 69 साल पहले मनाया गया था। यहां स्वतंत्रता दिवस एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। पूरे देश में ऐसा उत्सव और कहीं नहीं मनाया जाता है।
विज्ञापन

2 of 5
independence day celebration in india last village niti
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली की निति घाटी के गमशाली गांव में स्थित दम्फुधार में आज भी आजादी का जश्न उसी तरह से मनाया जाता है जिस तरह से 69 साल पहले मनाया गया था। गौरतलब है की 14 अगस्त 1947 को जैसे ही रेडियो पर प्रसारण हुआ की देश आजाद हो गया है तो सारा देश ख़ुशी से झूम उठा, सीमांत घाटी होने के कारण यहां के लोगों को इसकी सूचना अगले दिन 15 अगस्त 1947 की सुबह मिली।
विज्ञापन

3 of 5
independence day celebration in india last village niti
देश की आजादी की सूचना मिलते ही पूरी घाटी के लोग ख़ुशी से झुमने लगे, लोगों ने अपने घरों में आजादी के दीप जलाये, जिसके बाद सभी लोग गमशाली के दम्फुधार में अपने परम्परागत परिधानों को पहनकर एकत्रित होने लगे। आजादी के जश्न की ख़ुशी पर लोग एक दूसरे को बधाई देने लगे और गले मिलकर ख़ुशी का इजहार किया। जिसके बाद दम्फुधार में परम्परागत लोकनृत्य के जरिये आजादी की खुशी का इजहार किया गया।

4 of 5
independence day celebration in india last village niti
इस घाटी के लोगों का वह उत्साह आज भी उसी तरह से बरकरार है आज भी इस दिन सम्पूर्ण घाटी के लोग परम्परागत वेशभूषा धारण कर घरों में आजादी के दीये जलाते हैं। साथ ही तरह तरह के पकवान भी बनाते हैं, इसके अलावा परम्परागत नृत्यों में रम जाते हैं। नीति गांव, गमशाली, फारकिया, बाम्पा सहित दर्जनों गांवों के लोग ढोलों की थापों के साथ आकर्षक झांकियों के रूप में बारी बारी से गमशाली गांव के दम्फुधार में एकत्रित होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
independence day celebration in india last village niti
इस दौरान प्रत्येक गांव की अपनी अलग वेषभूषा होती है, झांकी होती है, जिसमे देशभक्ति को दर्शाया जाता है, प्रत्येक गांव के नवयुवक मंगल दल, महिला मंगल दल, सहित बुजुर्ग भी बढ़ चढ़कर इसमें हिस्सा लेते हैं, जब सारे गांव की झांकियां दम्फुधार में पहुंचती है तो वहां पर मुख्य अतिथि द्वारा झंडारोहण किया जाता है, जिसके पश्चात प्रत्येक गांव द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है, तत्पश्चात पारितोषिक व मिठाई वितरण का कार्यक्रम किया जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें