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19 साल बाद स्वतंत्रता दिवस व रक्षाबंधन एक साथ और संयोग भी है बेहद खास

Thu, 15 Aug 2019 09:13 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
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प्रतीकात्मक
इस साल भाई-बहन के पवित्र त्योहार रक्षाबंधन पर्व पर अनोखा संयोग बन रहा है। 19 साल के बाद रक्षाबंधन पर्व और स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन मनाने का योग बन रहा है। इससे पहले यह संयोग 2000 में बना था।
 
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फाइल फोटो
इस बार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ज्योतिष के मुताबिक भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए बहनें निश्चिंत होकर दिनभर में किसी भी समय अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला
श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के साथ श्रवण नक्षत्र में रक्षाबंधन का विशेष संयोग बन रहा है। इस साल अच्छी बात यह है कि 15 अगस्त को भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही खत्म हो जाएगी, इसलिए बहनें निश्चिंत होकर दिनभर में किसी भी समय भाइयों को राखी बांध सकती हैं।
 

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- फोटो : self
ज्योतिष के अनुसार इस साल पूर्णिमा तिथि एक दिन पहले शुरू होने के कारण ऐसा योग बन रहा है। इस साल पूर्णिमा तिथि 14 अगस्त बुधवार को शाम 3.45 बजे से शुरू हो जाएगी। इसका समापन 15 अगस्त को शाम 5.59 बजे होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
14 अगस्त को भद्रा व्याप्त रहेगी, लेकिन 15 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। वहीं ज्योतिषाचार्य भाष्कर जोशी का कहना है कि रक्षा सूत्र सिंथेटिक की जगह सूत का लाल धागा होना शुभ होता है। साथ ही रक्षासूत्र बांधते समय बहनों को इस मंत्र का वाचन भी आवश्यक रूप से करना चाहिए ‘येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल’। 
 
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मंदिर में पूजा करते भक्त - फोटो : अमर उजाला
क्या है भद्रा : देव और दानवों के युद्ध में भगवान शिव के शरीर से भद्रा उत्पन्न हुई। दैत्यों के संहार के लिए गर्दभ के मुख और लंबी पूंछ वाली भद्रा को ज्योतिष शास्त्र में सर्पिणी के समान विषैला बताया गया है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने प्राचीन काल से ही भद्रा की अवधि को समस्त मांगलिक कार्यों के लिए निषिद्ध घोषित किया था। 
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