मां-बाप का साथ छोड़ने वालों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपचार का लाभ नहीं मिल पा रहा है। राशन कार्ड में परिवार के सदस्य के रूप में माता-पिता का नाम न लिखवाने वालों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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Hospital
अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों की ओर से अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी गई है।
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harish rawat
- फोटो : amar ujala
प्रदेश के सरकारी और सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरूआत की। इसके तहत परिवार के मुखिया के नाम पर एमएसबीवाई कार्ड बनाया जाता है।
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डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
परिवार के मुखिया या किसी भी आश्रित को अस्पताल में उपचार कराने के लिए कार्ड के साथ राशन कार्ड जमा कराना होता है ताकि उनके एक ही परिवार से होने की तस्दीक हो सके। लेकिन एमएसबीवाई कार्ड बनाने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने माता-पिता से अलग राशन कार्ड बनवा लिया। माता-पिता के राशन कार्ड में उनका नाम नहीं है।
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राशन कार्ड
- फोटो : file photo
ऐसे लोग जब अस्पतालों में अपने माता-पिता के नाम से बना एमएसबीवाई कार्ड लेकर पहुंच रहे हैं तो उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। राशन कार्ड में उनका नाम न होने के चलते उन्हें योजना का लाभ नहीं नहीं मिल पा रहा है। कई लोग एमएसबीवाई कार्ड होने के बावजूद उपचार न मिलने पर लड़ने-झगड़ने को भी तैयार हो जा रहे हैं।
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जिन लोगों ने अपना नाम माता-पिता या परिवार के राशन कार्ड से हटाकर खुद का नया राशन कार्ड बना लिया है, उन्हें नया एमएसबीवाई कार्ड भी बनाना होगा। तभी उन्हें योजना का लाभ मिल सकेगा। पुराने कार्ड पर उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
इस संबंध में अधिकारियों को जानकारी दी गई है। राशन कार्ड में परिवार के जिन सदस्यों के नाम होते हैं केवल उन्हें ही योजना का लाभ दिया जाता है। हम नियमों के अनुसार ही योजनाओं का लाभ दे रहे हैं।
- डा. केके टम्टा, चिकित्साधीक्षक, दून अस्पताल