देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी की पासिंग आउट परेड के बाद देश को 469 यंग ऑफिसर मिले। इन अफसरों की सफलता की कहानी पढ़कर आपका सीना भी जोश से भर जाएगा।
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युवा आर्मी अफसरों की कहानी पढ़कर जोश से भर जाएगा देश का हर लाल
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आलोक नेगी इंडियन मिलिट्री एकेडमी की पासिंग आउट परेड में लेफ्टिनेंट आलोक नेगी ने उत्तराखंड का मान बढ़ाया। हाजीपीर कंपनी को पीओपी में सर्वश्रेष्ठ मानते हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ से नवाजा गया। यह सम्मान आर्मी चीफ से दून निवासी आलोक नेगी ने लिया। दून के रायपुर निवासी नायब सूबेदार एसएस नेगी के बेटे आलोक नेगी ने आर्मी चीफ जनरल जीएस सुहाग से यह सम्मान लिया। आलोक की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय ओएलएफ से हुई है। इसके बाद उनका चयन एनडीए खड़गवासला में हुआ। यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद आलोक आईएमए पहुंचे। यहां कड़े प्रशिक्षण और सम्मान के साथ वह पासआउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बन गए।
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हर्षित कोहली चंडीगढ़ निवासी कोहली परिवार का बेटा हर्षित कोहली भी सेना में अधिकारी बन गया है। शनिवार को हुई आईएमए की पासिंग आउट परेड में हर्षित बतौर लेफ्टिनेंट पासआउट हुए। चंडीगढ़ के सेक्टर 43 निवासी हर्षित कोहली ने कंप्यूटर साइंस में बीई किया है। इसके बाद अच्छे पैकेज वाली जॉब करने के बजाय उन्होंने सेना की राह चुनी। डायरेक्ट एंट्री से भारतीय सैन्य अकादमी में प्रवेश पाया। हर्षित के पिता राजकुमार कोहली बैंक में जॉब करते हैं जबकि मां ललिता कोहली शिक्षिका हैं। हर्षित ने बताया कि उनके अंकल मेजर जनरल टीएन मोगा (रिट.) उनके प्रेरणास्त्रोत हैं।
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मंदीप सिंह देहरादून निवासी सिंह परिवार का पहला बेटा सेना में अफसर बना है। इससे पहले उनके परिवार से कोई भी सेना में नहीं रहा। बीटेक की डिग्री लेने के बाद सेना चुनने वाली लेफ्टिनेंट मंदीप सिंह को प्राइवेट जॉब के बजाए देश के लिए कुछ करने का जज्बा सेना में लेकर गया। दून के रायपुर निवासी आलम सिंह ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत हैं। उनका बेटा मंदीप सिंह शनिवार को आईएमए की पीओपी से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया। मंदीप ने शिवालिक कॉलेज आफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। मंदीप ने बताया कि प्राइवेट कंपनी में इतनी मेहनत करने के बाद सैलरी तो बढ़ सकती है, लेकिन देश के लिए कुछ नहीं कर पाते। मंदीप ने बताया कि वह हमेशा देश के लिए कुछ करना चाहते थे, इसलिए सेना चुनी।
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अविनाश नेगी उत्तराखंड के रामनगर निवासी सूबेदार एसएस नेगी (रिट.) के पूरे परिवार के लिए शनिवार का दिन खुशी की सौगात लेकर आया। छोटा बेटा अविनाश नेगी पीओपी का अंतिम पग पार करते ही सेना में लेफ्टिनेंट बन गया। बड़ा बेटा पहले ही सेना में कैप्टन है। शनिवार को आईएमए की पासिंग आउट परेड में रामनगर निवासी सूबेदार एसएस नेगी (रिट.) और उनकी पत्नी हेमलता नेगी का सपना सच हो गया। बड़े बेटे के बाद अब छोटा बेटा भी सेना में अफसर बन गया। उनका बड़ा बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जॉब छोड़कर सेना में गया और सितंबर 2014 में ओटीए चेन्नई से बतौर कैप्टन पासआउट हुआ। पिता और बड़े भाई से प्रेरणा लेने वाला छोटा बेटा अविनाश नेगी भी सेना में जाना चाहता था। केंद्रीय विद्यालय हैदराबाद से 12वीं करने वाले अविनाश ने आईएमए में डायरेक्ट एंट्री पाई।
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सुधीर शर्मा अंबाला के यमुनानगर निवासी किसान राजेंद्र शर्मा के लिए शनिवार का दिन खास बन गया। उनका पहला बेटा सुधीर शर्मा भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया। आईएमए की पासिंग आउट परेड से यमुनानगर निवासी सुधीर शर्मा भी बतौर लेफ्टिनेंट पासआउट हुए। उनके पिता राजेंद्र शर्मा यमुनानगर में कृषि करते हैं जबकि मां पुष्पा शर्मा गृहिणी हैं। बड़ा भाई सुशील शर्मा केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक है। ले. सुधीर ने बताया कि उनके कई दोस्त सेना में थे। उन्हें देखकर ही सुधीर को भी सेना में जाने की प्रेरणा मिली।
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नरेंद्र दहिया हरियाणा के सोनीपत निवासी नरेंद्र दहिया ने भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पासआउट होकर दादा का सपना पूरा कर दिया। हालांकि दादा आज इस दुनिया में नहीं है, पर जहां भी वो होंगे आज जरूर पोते की कामयाबी पर खुशी मना रहे होंगे। नरेंद्र के पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं। सोनीपत निवासी पुलिस में कार्यरत ओम प्रकाश दहिया का बेटा नरेंद्र दहिया परिवार का सेना में अफसर बनने पहला वाला बेटा है। नरेंद्र ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद आईएमए में डायरेक्ट एंट्री पाई थी। यहां कड़े प्रशिक्षण के बाद शनिवार को वह सेना में लेफ्टिनेंट बन गए।
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दीपक भारद्वाज देहरादून के भारद्वाज परिवार के लिए शनिवार का दिन खास बन गया। परिवार का तीसरी पीढ़ी का बेटा दीपक भारद्वाज सेना में अफसर बना तो परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। दीपक के पिता और दादा सेना से रिटायर्ड हैं। गढ़ी कैंट निवासी नायक राजकुमार भारद्वाज रिटायर्ड का बेटा शनिवार को आईएमए की पीओपी से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया। बचपन से पिता को देखकर बेटे में भी सेना में जाने की इच्छा जागृत हुई। शुरुआती पढ़ाई के बाद राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज में एंट्री मिली तो परिवार को पहली खुशी मिली। यहां से कठिन प्रशिक्षण के बाद दीपक का चयन एनडीए खड़गवासला के लिए हो गया। वहां भी उन्होंने कड़ी मेहनत की। इसके बाद आईएमए में एंट्री पाई।
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ध्रुव गुसाईं देहरादून के गुसाईं परिवार के लिए उस वक्त खुशी का ठिकाना न रहा जब बड़ा बेटा ध्रुव गुसाईं ट्रेनिंग पूरी कर आईएमए से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया। जबकि छोटा बेटा ओटीए गया से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। देहरादून के विजय कॉलोनी, हाथीबड़कला निवासी डीएस गुसाईं पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर हैं। उनकी पत्नी विनीता गुसाईं गृहणि हैं। उनके दो बेटे हैं और दोनों ही सेना में चले गए हैं। दूसरी ओर, उनके छोटे भाई वैभव गुसाईं का प्रशिक्षण ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, गया में शुरू हो गया है। जल्द ही वैभव भी सेना में अफसर बन जाएगा।
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विवेक चंद्रा अफसर दामाद के बाद अब बेटा भी सेना में अफसर बन गया है। ले. कर्नल राजबीर सिंह को अफसर बेटे ने सैल्यूट किया तो उनके चेहरे पर गर्वमिश्रित खुशी के भाव नजर आए। उनका दामाद पहले से आर्मी में मेजर पद पर तैनात है। आगरा के गामरी गांव निवासी ले. कर्नल राजबीर सिंह और उनकी पत्नी मुन्नी चंद्रा के लिए शनिवार का दिन खास बन गया। उनका बेटा विवेक चंद्रा आईएमए देहरादून से पासआउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बन गया। दामाद कुमार अंकुर पहले से ही सेना में मेजर हैं और 174 मीडियम रेजीमेंट में तैनात है। ले. कर्नल राजबीर सिंह 138 मीडियम रेजीमेंट में तैनात हैं।
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आशीष मेहता पिता ने बचपन से ही बेटे को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया। शनिवार को जब बेटा आशीष मेहता आईएमए से पासआउट होकर सेना में अफसर बना तो परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। आशीष ने एनडीए से आईएमए तक का सफर तय किया है। अंबाला निवासी राजेंद्र कुमार मेहता मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं। बावजूद इसके वह बचपन से बेटे आशीष को सेना में जाने के प्रति प्रेरित करते थे। अंबाला कैंट होने के नाते यहां के माहौल से भी आशीष को हौसला मिला। उन्होंने 12वीं करने के बाद एनडीए में एंट्री पाई। इसके बाद कड़ी मेहनत के दम पर आईएमए ज्वाइन किया। आईएमए में कड़ा प्रशिक्षण भी उनका हौसला न डिगा सका।
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सूरज फर्त्याल चंपावत के बेटे सूरज ने सेना में अफसर बनकर नया मुकाम हासिल किया है। सूरज पासिंग आउट परेड से सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। उनके पिता सेना में हवलदार पद से रिटायर्ड हैं। आईएमए की पीओपी के दौरान पिता ने अफसर बेटे को सैल्यूट किया। लोहाघाट, चंपावत निवासी सेना में बतौर हवलदार रिटायर्ड डीएस फर्त्याल का बेटा सूरज फर्त्याल पीओपी में पासआउट होकर लेफ्टिनेंट बन गया। पिता को आदर्श व प्रेरणास्त्रोत मानने वाले सूरज के लिए यह लम्हे बेहद गौरव के थे।
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जगमोहन उपाध्याय आगरा के उपाध्याय परिवार के लिए सैन्य परंपराएं उनकी रगों में बसी हैं। सूबेदार एमएल उपाध्याय के बड़े बेटे के बाद अब छोटा बेटा जगमोहन उपाध्याय भी आईएमए से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया है। खास बात यह है कि बड़े बेटे की होने वाली बहू भी सेना में लेफ्टिनेंट है। आगरा निवासी सूबेदार एमएल उपाध्याय का बड़ा बेटा राम मोहन उपाध्याय 2012 में आईएमए से बतौर कैप्टन पासआउट हुआ था। पिता और बड़े भाई को देखकर जगमोहन उपाध्याय ने भी सेना में जाने का फैसला लिया। उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर आईएमए में एंट्री पाई।
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रोहित शर्मा हरियाणा गुड़गांव के रोहित शर्मा परिवार में तीसरी पीढ़ी के सैन्य अफसर बन गए हैं। आईएमए से शनिवार को पासआउट हुए रोहित के पिता रमेश चंद भारतीय नौसेना में मास्टर चीफ पैटी अफसर हैं, जबकि दादा मामराय शर्मा नौसेना में आनरेरी सब लेफ्टिनेंट पद से रिटायर हुए थे। सेना में सीधे अफसर बनने वाले रोहित परिवार में पहले हैं। रोहित के पिता रमेश चंद शर्मा ने बताया कि उनके परिवार में सेना में सेवाएं देने की परंपरा रही है।