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IMA POP 2019: देवभूमि के इन बहादुर बेटों के कंधे पर सजे सितारे, तस्वीरों में देखें गौरवांवित पल

Sun, 09 Jun 2019 10:08 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
आईएमए में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान 382 कैडेट सेना में शामिल हुए। जिनमें से देवभूमि उत्तराखंड के युवा अफसर भी शामिल हैं। उड़ीसा के रहने वाले संबिती कुमार पार्ही के परिवार के लिए शनिवार का दिन खुशियां लेकर आया। देहरादून रायपुर की रहने वाली उनकी पत्नी शिप्रा नेगी की खुशी देखते ही बन रही थी। वह अपने पति के अफसर बनने से गदगद थीं। पिता गंगाधर तथा माता शैलबाला का सीना गर्व से चौड़ा है। मां शैलबाला कहती हैं कि बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। कहती हैं कि बेटा संबिती ने परिवार का नाम रोशन किया है। वह बचपन से ही सेना में जाना चाहता था। आज उसका सपना पूरा हो गया। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
पिथौरागढ़ के ही रहने वाले बृजमोहन जोशी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोगना में अध्यापक हैं। जबकि, पत्नी अनिता जोशी घारी बड़ावे स्थित सरकारी स्कूल की हेड टीचर हैं। कुछ साल पहले परिवार का बड़ा बेटा अर्द्धसैनिक बल का असिस्टेंट कमांडेंट बना था और शनिवार को छोटा प्रशांत भी भारतीय थल सेना का अफसर बन गया। प्रशांत के मामा वायु सेना में विंग कमांडर के पद पर तैनात हैं। जबकि, ताऊ जुगल किशोर जोशी एसबीआई पिथौरागढ़ में नौकरी करते हैं। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस अधिकारी के घर के अनुशासन ने बेटे की सैन्य अधिकारी बनने की राह आसान बना दी। अपर पुलिस अधीक्षक जीएस पांडेय के बेटे कुशाग्र ने अपने कंधों पर सजे सितारों का श्रेय अपने पापा के अनुशासन को दिया। कुशाग्र ने बताया कि वे बचपन से ही पिता के अनुशासन को देखते आ रहे थे, इसका परिणाम ये हुआ कि आज वह देश के सबसे अनुशासित संस्थान का हिस्सा बन गए। उत्तराखंड पुलिस के एएसपी जीएस पांडेय नैनीताल में तैनात हैं। उनका एक बेटा यशस्वी मुंबई स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ कर रहा है। 
 

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- फोटो : अमर उजाला
ऊधमसिंह नगर के पंत नगर निवासी किसान बलवंत मनराल के बेटे अमनदीप मनराल ने शनिवार को सेना में अफसर बने। इसे लेकर माता-पिता के साथ ही परिवार के अन्य लोग काफी खुश हैं। पिता ने बताया कि उनकी दिली इच्छा थी कि उनका बेटा सेना में अफसर बने। बेटा अमनदीप भी इस बात को समझता था। यही वजह है कि उसने बचपन से ही सेना में जाने का मन बना लिया था। इसे लेकर उसने काफी मेहनत की। आज उसे सेना की वर्दी में देखकर दिल बहुत खुश है। वहीं, अमनदीप कहते हैं कि परिवार के सभी सदस्यों ने भी उनका काफी आत्मविश्वास बढ़ाया। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
रानीखेत के मासी निवासी करन सिंह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो सेना में है। करन के पिता जहां सूबेदार मेजर हैं, वहीं दादा हवलदार थे। बेटे के अफसर बनने से परिवार के लोग काफी खुश हैं। बैरकपुर कोलकाता स्थित आर्मी स्कूल से 12वीं की परीक्षा के बाद उन्होंने एनडीए की परीक्षा दी। जिसके बाद आज वह लेफ्टिनेंट बनकर निकले। करन बताते हैं कि दादा नंदन सिंह हवलदार थे, जबकि पिता सुंदर सिंह सूबेदार मेजर हैं। कहते हैं कि बचपन से ही पिता की वर्दी प्रभावित करती थी। घरवालों से कहता था कि मैं भी बड़ा होकर सेना में अफसर बनूंगा। आज वह सपना पूरा हो गया।
 
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‘फर्स्ट सेल्यूट टू माई डियर डैड’ यह शब्द अफसर बने देहरादून के तपोवन आमवाला निवासी आयुष सिंह रावत के थे। उन्होंने अफसर बनने के बाद जैसे ही पिता पीयूष सिंह रावत को सैल्यूट किया, उनकी आंखें डबडबा उठीं। बेटे के अफसर बनने पर परिवार के अन्य सदस्यों के चेहरे भी खुशी से चमक उठे। आयुष के पिता पीयूष सिंह रावत ओएनजीसी में कार्यरत हैं। आयुष बताते हैं कि पिता पीयूष बचपन में उनसे कहते थे कि तुझे बड़ा होकर अफसर बनना है। जिसे लेकर मैंने बचपन से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। आज वह सपना पूरा हो गया है। वहीं, पिता भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनके बेटे ने बहुत मेहनत की है, जिसके चलते आज वह अफसर बना है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
आईएमए से पास आउट होने के बाद पुरोला उत्तरकाशी के रोहित भंडारी ने कहा कि जितनी खुशी उन्हें सैन्य अफसर बनने पर है उससे कहीं अधिक कैप्टन विक्रम बत्रा की रेजीमेंट का हिस्सा बनने से हुई है। भंडारी ने कहा कि उन्हें फक्र है कि वे कारगिल हीरो का हिस्सा बने हैं। रोहित भंडारी तीन साल पहले एयरफोर्स में बतौर एयरमैन भर्ती हुए थे। वहां से एसीसी में सेलेक्ट हो गए और आईएमए में कड़ा प्रशिक्षण हासिल कर शनिवार को अफसर बन गए। भंडारी के अनुसार सेना सिर्फ नौकरी के लिए एक आर्गेनाइजेशन नहीं है बल्कि आर्मी जीना सिखाती है। हमारे जीवन को और ज्यादा निखार देती है सेना।
 
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ये शौर्य की मेहनत का ही नतीजा था कि उन्होंने वर्ष 2015 में एनडीए की परीक्षा पास की। इसके अलावा उन्होंने जेईई मेंस भी क्वालीफाई किया, लेकिन चुनाव सेना को। बेटे के अफसर बनने पर उनके माता-पिता भी काफी गदगद हैं।दून के जीएमएस रोड स्थित इंजीनियर एन्क्लेव निवासी शौर्य के लिए शनिवार को दिन काफी खास रहा। उनके पिता अनिल वर्मा ओएनजीसी में कार्यरत हैं। शौर्य बताते हैं कि उन्होंने अपनी शुरुआत पढ़ाई ऐनमैरी स्कूल से की। बचपन में उन्होंने ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म लक्ष्य देखी। इस फिल्म की शूटिंग आईएमए में ही हुई थी। जिसके कारण वह काफी प्रभावित हुए। 
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