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Uttarkashi CloudBurst: भूमध्य सागर से उठे विक्षोभ ने लिया विकराल रुप, 2013 की प्रलय जैसी थी धराली आपदा; खुलासा

Wed, 06 Aug 2025 09:20 AM IST
शाहरुख खान अंकित गर्ग, अमर उजाला, रुड़की

सार

उत्तरकाशी में भूमध्य सागर से उठे विक्षोभ ने विकराल रुप ले लिया। धराली आपदा 2013 की प्रलय जैसी थी। आईआईटी वैज्ञानिक ने खुलासा किया है। मंगलवार को बादल फटने से खीरगंगा नदी में सैलाब आ गया था। सैलाब में चार लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। जबकि करीब 70 लोग लापता बताए जा रहे हैं। 
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
उत्तरकाशी में आई आपदा का पैटर्न वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई जल प्रलय की तरह ही था। दोनों घटनाओं की वजह भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ का हिमालय से टकराना रहा है। जिससे बादल फटने की घटना ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया। यह कहना है आईआईटी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर अंकित अग्रवाल का।

उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब पश्चिमी विक्षोभ और मानसून आगे की तरफ शिफ्ट हो रहा है। 2013 में केदारनाथ में भी इसी तरह का पश्चिमी विक्षोभ का असर था, जो मंगलवार को उत्तरकाशी में था। 
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
बता दें कि आईआईटी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक जर्मनी की पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी के साथ इंडो जर्मन परियोजना पर काम कर रहे हैं। जिसमें भारतीय हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक खतरों (बादल फटने और अतिवृष्टि) का आकलन एवं भविष्यवाणी पर शोध किया जा रहा है। 
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही, बचाव कार्य में जुटे जवान - फोटो : पीटीआई
जलवायु परिवर्तन इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार
प्रोफेसर अग्रवाल के मुताबिक जलवायु परिवर्तन इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार बन रहे हैं। भूमध्य सागर से उठने वाली हवाएं जब पश्चिम से पूरब की ओर चलती हैं तो हिमालय से टकराती हैं जिससे बादल फटने जैसी आशंका बढ़ जाती है। 


 

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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही, घायलों का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : पीटीआई
अब पश्चिम विक्षोभ का पैटर्न बदल रहा है और यह विक्षोभ मध्य भारत से हिमालय की तरफ खिंच रहा है। जो बड़ी मात्रा में अपने साथ नमी लेकर हिमालय की ओर बढ़ता है।

 
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
इसी के चलते हिमालयी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू आदि में एक साथ सामान्य से अधिक वर्षा हो रही है। 25 साल पीछे की तरफ जाएं तो पश्चिमी विक्षोभ अक्तूबर से दिसंबर माह के बीच होते थे। लेकिन अब यह जून से अगस्त माह में ही सक्रिय होने लगे हैं। यह बदला हुआ पैटर्न प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से खतरे का संकेत है।

 
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
हिमाचल में भी इसी पैटर्न पर आ रही आपदा
प्रो. अग्रवाल के मुताबिक हिमाचल और उत्तराखंड में इसी पैटर्न पर अतिवृष्टि और बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। हिमाचल में सितंबर 2023 में कई जगहों पर हुई तबाही के पीछे भी पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना था।
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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही
उत्तरकाशी में जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर धराली गांव के ऊपर खीरगंगा में मंगलवार दोपहर बादल फटने से खीरगंगा नदी में सैलाब आ गया। तेजी से आए मलबे और पानी की चपेट में आने से धराली का मुख्य बाजार पूरी तरह तबाह हो गया। साथ ही प्रसिद्ध कल्प केदार मंदिर भी पूरी तरह मलबे में बह गया है। 

 

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उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद तबाही, बचाव कार्य में जुटे जवान - फोटो : पीटीआई
जिला प्रशासन ने बताया कि देर शाम तक 130 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका था। चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। जबकि करीब 70 लोग लापता बताए जा रहे हैं। साथ ही 30 होटल-दुकान-घर मलबे में बहने के कयास लगाए जा रहे हैं। हर्षिल घाटी में मंगलवार को तीन जगह बादल फटे।

 

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही - फोटो : पीटीआई
खीर गंगा में बादल फटने से सबसे ज्यादा तबाही धराली में मची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 1.50 बजे गांव के ऊपर बादल फटा। इसके बाद महज 20 सेकंड के भीतर खीरगंगा नदी का पानी और मलबा मुख्य बाजार की ओर मुड़ गया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे, लेकिन इससे पहले कि वह सुरक्षित जगह पर पहुंच पाते सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया। 

 

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही - फोटो : पीटीआई
वहां मौजूद कई होटल, रिसॉर्ट, दुकानें, घर और सेब के बगीचे जमींदोज हो गए। वहां चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते पूरा बाजार मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया और एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और पुलिस की टीमें मौके पर भेजी गई। बचाव दल ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया और होटल में फंसे कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। 
 

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही - फोटो : पीटीआई
केंद्र व वायु सेना से मांगे दो एमआई, एक चिनूक
प्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र सरकार व वायु सेना से रेस्क्यू अभियान के लिए दो एमआई और एक चिनूक मांगा गया है। लगातार बारिश के कारण हेलिकॉप्टरों की उड़ान में बाधा आ रही है। यूकाडा ने भी बचाव कार्यों के लिए दो निजी हेलिकॉप्टर तैयार रखे हैं। मौसम साफ होते ही वायु सेना हेलिकॉप्टर से राहत पहुंचाएगी।
 

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही - फोटो : पीटीआई
व्यावसायिक इमारतों को हुआ ज्यादा नुकसान
लोगों का कहना है कि अगर नदी का बहाव सीधे आगे बढ़ता तो गांव की बस्ती को भी भारी नुकसान हो सकता था लेकिन पानी बाजार की ओर मुड़ जाने से सबसे ज्यादा नुकसान व्यावसायिक इमारतों को हुआ है। एक बार पानी के साथ मलबा आया व उसके बाद कुछ देर के लिए रुक गया। कुछ देर बाद दोबारा मलबा आया।

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही - फोटो : पीटीआई
प्रभावितों की हरसंभव मदद के निर्देश : सीएम
सीएम धामी ने बताया कि जिला प्रशासन, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत अन्य एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। प्राथमिकता के आधार पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावितों की हर संभव मदद के निर्देश दिए गए हैं।

 
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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, राहत एवं बचाव कार्य में जुटे जवान - फोटो : पीटीआई
हर्षिल में राहत शिविर बना
घटना की जानकारी मिलते ही डीएम प्रशांत आर्य और एसपी सरिता डोवाल मौके के लिए रवाना हो गए हैं। प्रशासन ने हर्षिल में राहत शिविर भी स्थापित किए हैं। डीएम ने बताया कि नुकसान का पूरा आकलन मौके पर पहुंचकर किया जाएगा।

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