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साइकेट्रिस्ट का नवरात्र के बारे में बड़ा दावा, बॉडी में होते हैं हारमोनल चेंज

Wed, 05 Oct 2016 08:34 AM IST
गौरव मिश्रा/अमर उजाला, देहरादून
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डॉ. नंदकिशोर - फोटो : AmarUjala
नवरात्र पर्व का सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए अमृत का काम करता है। यह बात कोई धार्मिक संकल्पना नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। जाने माने मनोचिकित्सक और पैरासाइकोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. नंदकिशोर ने अपने 35 साल के अनुभव के आधार पर यह दावा जताया है।
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परामनोवैज्ञान‌िक
उन्होंने कहा कि नवरात्र के दिनों में मनोरोगों के मरीजों की संख्या कम हो जाती है। इसके साथ ही ऐसे रोगियों में रोग से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
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डॉ. नंदकिशोर - फोटो : AmarUjala
मनोचिकित्सक डॉ. नंदकिशोर का कहना है कि हमारे जीवन में तनाव, दबाव, अस्थिरता, अनिश्चितता बहुत बढ़ गई है। हमारी आर्थिक-वित्तीय नीति पूरी तरह से बाजार आधारित हो गई है। इसके साथ ही हमारे समाज की सबसे मजबूत इकाई परिवार का स्वरूप भी बदल गया है।

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नवरात्रि का महत्व - फोटो : Self
संयुक्त परिवारों का खत्म होना और न्यूक्लियर फैमिली का स्ट्रक्चर भी माइक्रो न्यूक्लियर फैमिली जैसा होने से एकाकीपन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नवरात्र जैसे पवित्र उत्सव व्यक्ति व समाज में सकारात्मक, रचनात्मक व बेहद गहरी ऊर्जा प्रवाहित करते हैं। नवरात्र जैसे उत्सव अवसाद समेत तमाम मनोवैज्ञानिक रोगों की ताकत को कम करते हैं।
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navratri - फोटो : अमर उजाला
यह अनुभवजन्य है कि इस पावन अवसर पर व्यक्ति आशा, उम्मीद, उत्साह और सकारात्मकता से भर जाता है। हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि नवरात्र समेत तमाम बड़े उत्सवों के पावन अवसर व्यक्ति के शरीर व मन में सकारात्मक हारमोनल बदलाव होते हैं।
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परामनोवैज्ञान‌िक
व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। विश्वविख्यात मनोवैज्ञानिक बर्नी सीगल ने भी इस संबंध में एक किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने ऐसे अवसरों पर जगने वाली आशा व भीतरी शक्ति की बढ़ोतरी पर प्रकाश डाला है। 
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नवरात्रि का महत्व - फोटो : gettyimages
अध्ययन से निकलने वाली खास बातें
- नवरात्र पर सामान्य दिनों की अपेक्षा दसवां हिस्सा हो जाती है मनोरोगियों की तादाद  
- नवरात्र पर होता है शरीर व मन से होता है पॉजीटिव सैक्रीशन 
- ऑक्सीटॉसिन-एनडॉरफिन जैसे जैविक रासायनिक स्राव होने से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा 
- बढ़ जाती है प्रतिरोधक क्षमता, रोगों का होता है कम असर  
- नवरात्र समेत सामूहिक उत्सवों में दवा करती है अधिक असर 
- अवसाद पर सीधा हमला करता है नवरात्र 
- मंत्रों व ऋचाओं में होती है सकारात्मक ऊर्जा 
- जीवन की एकरसता से मिलती है मुक्ति
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