holika dahan
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भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और उसे छल से मारने वाली होलिका स्वयं जल गई, भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि में होलिका दहन करना चाहिए। होलिका दहन से अगले दिन रंगों से खेला जाता है, इसलिए इसे रंग वाली होली और धुलहंडी भी कहा जाता है।