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फिर गुलज़ार होगी 'योगी' की नगरी, वास्तुकला का अद्भुत नमुना है ये गुंबदनुमा 84 कुटियां, तस्वीरें

Thu, 24 Aug 2017 05:35 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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chaurasi kutiya
'योगी' की कुट‌िया एक बाद फ‌िर पयर्टकों से गुलजार होगी। जी हां, इस कुट‌िया से दुन‌िया के कई बड़े बैंड भी इत‌िहास रच चुके हैं। आगे जान‌िए क्या है पूरा मामला...
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प्रसिद्ध अमेरिकन म्यूजिकल ग्रुप बीटल्स के कारण ऋष‌िकेश की चौरासी कुट‌िया यानी महर्षि महेश योगी की ध्यान नगरी पयर्टकों से गुलजार होने जा रही है। इस ग्रुप के चार सदस्य जॉन लिनोन, पॉल मेकार्टनी, जार्ज हेरिशन व रिगो स्टार वर्ष 1967-68 में पूरे एक साल इस केंद्र में रहे और भावातीत ध्यान की दीक्षा ली। बीटल्स ग्रुप के इन सितारों ने यहां रहते हुए कई यादगार धुन भी रचीं।
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गौरतलब है क‌ि, महर्षि महेश योगी ने साठ के दशक में तीर्थनगरी ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी।  इस नगर में चौरासी गुंबदनुमा कुटियों का निर्माण किया गया था। यह कुट‌िया वास्तुकला की अद्भुत कृतियों वाले इस नगर की ख्यात‌ि आज क‌िसी से छ‌िप‌ि नहीं है। 

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बता दें क‌ि, राजाजी टाइगर रिजर्व महर्षि की इस धरोहर को दोबारा उसके मूल स्वरूप में लाने जा रहा है। चार दशक पुरानी इस कुट‌िया में लोग उस दौर को ही याद नहीं करेंगे बल्क‌ि यहां की खूबसूरत कुटी में बैठकर ध्यान भी लगा सकेंगे। 
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वर्ष 1980 में यह क्षेत्र राजाजी नेशनल पार्क की सीमा में आ गया,  इसके बाद इसे 1985 में इसे बंद कर दिया गया।  तीन दशक तक बंद रहने के बाद यह केंद्र अब खंडहर जैसा हो चुका है।
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हालांकि, आठ दिसंबर 2015 को राजाजी टाइगर रिजर्व ने चौरासी कुटी को नेचर ट्रेल व बर्ड वॉचिंग के लिए खोला गया। इसके पीछे मकसद महर्षि महेश योगी और यहां से जुड़े रहे पश्चिम के मशहूर बैंड बीटल्स ग्रुप की स्मृतियों को भी नई पहचान देना था। लेक‌िन इसके फ‌िर बंद कर द‌िया गया।
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राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर का कहना है क‌ि, इस बार सहां बने भवनों, गुंबदनुमा 84 कुटिया, योग हॉल व अन्य इमारतों का उनके मूल स्वरूप और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बिना जीर्णोद्धार किया जाएगा। 
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ईको पर्यटन समिति के माध्यम से यहां योग-ध्यान की कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। इसके बाद यहां आने वाले पर्यटक महर्षि महेश योगी और बीटल्स के उस दौर को उसी अंदाज में महसूस करने के साथ योग-ध्यान और साधना भी कर सकेंगे। 
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