जलवायु परिवर्तन और भूगर्भीय उथल-पुथल का असर हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों पर पड़ रहा है। पहाड़ों पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों को कई क्षेत्रों में सदियों से चले आ रहे परंपरागत जलस्रोत गायब मिले हैं।
विज्ञापन
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
2 of 8
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (यूसैक) ने पर्वतीय क्षेत्रों के जल स्रोतों की मैपिंग की है। हिमालयी क्षेत्र के बहुत से जलस्रोतों के सूखने और पानी की मात्रा कम होने केसंबंध में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने भी पुष्टि की है।
विज्ञापन
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
3 of 8
वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में जमीन के भीतर प्लेटों की चाल बदलने से भूकंप पट्टियां तो सक्रिय हो ही रही हैं साथ ही इसका असर जलस्रोतों पर पड़ रहा है।
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
4 of 8
वैज्ञानिकों को अंदेशा है कि प्लेटों की चाल से पहाड़ की मिट्टी धसती रही है। इस कारण भी जलस्रोत बंद हो सकते हैं। कभी-कभी वे दूर किसी स्थान पर निकल आते हैं। वैज्ञानिक अब नए जलस्रोतों को ढूंढ़ने में जुट गए हैं।
विज्ञापन
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
5 of 8
जलवायु परिवर्तन से स्थिति और चिंताजनक बन रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन से बारिश का मिजाज बदला है। एक ही बार मूसलाधार बारिश होने से जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो पा रहे जिससे वे सूख रहे हैं।
विज्ञापन
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
6 of 8
देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और जलस्रोत विशेषज्ञ डॉ. एसके बरतरिया ने भी जलस्रोतों के सूखने और इसमें पानी कम होने की पुष्टि की है।
विज्ञापन
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
7 of 8
राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा यूसैक से कराई गई मैपिंग में पाया गया है कि पुराने जलस्रोत अब अपने स्थान पर मौजूद नहीं हैं।
OMG: हिमालय में हो रहे खतरनाक बदलाव से पड़ने लगा 'सूखा'
8 of 8
विभाग के सचिव दीपक कुमार ने बताया कि यूसैक के विज्ञानियों ने शासन को जो रिपोर्ट दी है उसमें वर्षा की अनियमितता, भूस्खलन, पेड़ों की कटान आदि को प्रमुख कारण बताया गया है। (स्टोरीः रजा शास्त्री)