इस देवता ने अपने चमत्कार से पूरे गांव ही नहीं बल्कि कई जगहों पर पानी की किल्लत को दूर किया था। देखिए अद्भुत नजारा...
विज्ञापन
2 of 6
Shirgul Devta
जौनसार बावर के लोगों के ईष्ट देव शिलगुर महाराज की जन्मस्थली हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के चूड़धार में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्वत सिरमौर जिले और बाह्य हिमालय की सबसे ऊंची चोटी है। जौनसार बावर के साथ ही चूड़धार स्थित शिलगुर देवता हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र है।
विज्ञापन
3 of 6
Shirgul Devta
चूड़धार तक पहुंचने के लिए जहां उत्तराखंड के लोगों को नौराधार होते हुए 14 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। वहीं हिमाचल के लोग सराहन चौपाल होते हुए चूड़धार की यात्रा तय करते हैं। यहां से यह दूरी महज छह किमी की है।
4 of 6
Shirgul Devta
मान्यता है कि चूड़धार में पहले पानी की कमी रहती थी। लेकिन शिलगुर देवता ने यहां पानी की कमी को दूर किया। जौनसार बावर के कई लोग यहां पर धार्मिक अनुष्ठान भी कराते हैं। सर्दियों में यह चोटी पूरी तरह बर्फ से ढकी रहती है। आदि शंकराचार्य ने हिमाचल प्रवास के दौरान यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।
विज्ञापन
5 of 6
Shirgul Devta
हर साल गर्मियों के दिनों में चूड़धार की यात्रा शुरू हो जाती है। यह चोटी ट्रैकिंग के लिए भी बेहद ही उपयुक्त है। परंतु यह चोटी दुर्गम तथा कम प्रचलित होने के कारण बाहरी पर्वतारोहियों के बीच में उतनी महत्वपूर्ण जगह नहीं बना पाई है। धीरे-धीरे बदलाव आना शुरू हो गया है क्योंकि यहां ट्रैकिंग की अपार संभावनाएं हैं।
जौनसार बावर क्षेत्र में भी शिलगुर महाराज के जगह-जगह मंदिर स्थापित हैं। जिनमें से सिमोग, डिमऊ, बाणाधार, साहिया में भी शिलगुर महाराज के मंदिर हैं। इन मंदिरों में दशहरा के अवसर पर बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। हर साल इन मंदिरों से देव पालकी अपने मूल स्थान चूड़धार भी जाती है। हिमाचल विधानसभा चुनाव के बाद इस स्थान के सौंदर्यीकरण को लेकर भी काम तेज हो सकता है।