विधानसभा चुनाव 2017 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा सरकार अभी थमने का नाम नहीं ले रही है। यहां अपने अलग अंदाज से भाजपा ने कांग्रेस का एक और किला भेदना शुरू किया है। उत्तराखंड सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद रविवार को उत्तराखंड सरकार अलग अंदाज में नजर आई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी पूरी कैबिनेट के साथ देहरादून के ब्रह्मपुरी एरिया में पहुंचे और कुछ ऐसा कर दिया जिसे कांग्रेस सकते में आ गई।
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trivendra singh rawat
- फोटो : amar ujala
ब्रह्मपुरी के गली-मुहल्ले में पहले कभी रविवार की सुबह जैसी सुबह नहीं हुई होगी। तंग गलियों में पूरी त्रिवेंद्र कैबिनेट। लोगों का अभिवादन स्वीकारते सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत। कोई हाथ में ज्ञापन लिए खड़ा है, तो कोई बालकनी से सड़क पर सरकार को देख रहा है। सीएम तेज कदमों से आगे बढ़ रहे हैं। उनका हमकदम बनने के लिए मंत्रियों को मशक्कत करनी पड़ रही है। कभी यशपाल आर्य आगे हो जाते हैं, तो कभी डॉ. धन सिंह रावत या फिर सतपाल महाराज। सरकार के सौ दिन पूरा होने पर जनता से जुड़ने का ये अलग अंदाज है।
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CM trivendra singh rawat
पिछड़े इलाकों पर फोकस करने का सरकार का ये संदेश एकदम खुला है। कुछ संदेश छिपे हुए भी हैं। कांग्रेस के जिन किलों को प्रचंड लहर से बीजेपी ने ध्वस्त किया है, उनमें सरकार अपनी प्रभावशाली मौजूदगी जाहिर करना चाहती है। ताकि धर्मपुर जैसी सीटों पर बीजेपी का और मजबूत रिश्ता कायम हो जाए।
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trivendra singh rawat
ब्रह्मपुरी एक प्रतीक है, जहां पर वोट बैंक तो मौजूद है, लेकिन सुविधाएं गायब हैं। बीजेपी के सामने बस्तियों के कई विकल्प मौजूद थे। मगर ब्रह्मपुरी पहली पसंद बनी, तो इसके खास कारण रहे। इस इलाके में कई साल तक कांग्रेस के दिनेश अग्रवाल ने बीजेपी को घुसपैठ करने का मौका नहीं दिया। इस बार इस क्षेत्र ने उन विनोद चमोली को चुन लिया, जो कि शहर के मेयर भी हैं।
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dehradun nagar nigam
ये फैसला बताता है कि लोगों को सरकार और नगर निगम बोर्ड में एक विचारधारा वाले दल की मौजदूगी में बेहतर काम की उम्मीद है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को इसका अनुमान है। इसीलिए लोगों से मुखाबित हुए, तो धर्मपुर सीट पर बीजेपी की जीत का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने कहा-मैं इसलिए भी यहां आना चाहता था, क्योंकि धर्मपुर सीट पर लोगों ने ऐतिहासिक फैसला किया और बीजेपी को उम्मीद से ज्यादा वोट दिए।
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trivendra singh rawat
सीएम और उनके कैबिनेट सहयोगी आधे घंटे से ज्यादा ब्रह्मपुरी के गली-मुहल्लों में रहे। इस दौरान करीब दो किमी का एरिया पैदल नापा। पिछले सौ दिन में कामकाज के जिस अंदाज को सीएम ने ज्यादातर अपनाया है, उसका सिलसिला जारी रखा। यानी ऐलान से भरसक बचने का प्रयास। लोगों का दबाव भी बना कि सीएम कोई ऐलान करके जाएं। मगर स्थिति नहीं बदली। सीएम का जोर ये भरोसा दिलाने पर ही रहा कि सरकार लोगों के साथ है।
इस दौरान, ब्रह्मपुरी में बने नगर निगम के आवासीय कॉम्पलेक्स के उपयोग की बात भी सामने आई, तो पूर्वांचल के लोगों के लिए छठ पार्क और बस्ती के बीच में स्कूल का जिक्र भी हुआ। सालों-साल धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी मायूसी झेलने वाले भाजपाइयों के चेहरे खिले दिखे। दिनेश अग्रवाल की छाया से बाहर निकले धर्मपुर क्षेत्र में सरकार की मौजूदगी से उपजा भाजपाईयों का उत्साह कभी जोरदार नारेबाजी के रूप में सामने आया, तो कभी एक-एक आदमी की सीएम और मंत्रियों से मुलाकात की कोशिश में दिखा। महेश पांडेय जैसे कई नेता ये कहते हुए सुने गए कि अब इस क्षेत्र में सालों-साल बीजेपी का ही परचम लहराएगा।