सुबह दस बजे सुखमणि पाठ, पूर्वाह्न 11.20 बजे शबद कीर्तन और दोपहर 12.30 बजे इस वर्ष की अंतिम अरदास पढ़ी गई। दोपहर ठीक एक बजकर 30 मिनट पर गुरु ग्रंथ साहिब को पंच प्यारों की अगुवाई में सचखंड में विराजमान करने के बाद हेमकुंड के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।