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उत्तराखंड: यहां बारिश ने मचाई ऐसी तबाही जिसकी तस्वीरें देख ताजे हो जाएंगे 2013 की आपदा के जख्म

Wed, 04 Jul 2018 09:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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flood - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी और मुनस्यारी क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने जमकर तबाही मचाई है। इस तबाही की तस्वीरें देख 2013 में आई केदारनाथ आपदा के जख्म ताजे हो जाएंगे। मुनस्यारी में सेराघाट के दानीबगड़ (मोतीघाट) गाड़ का जलस्तर बढ़ने से हिमालयन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की 10 मेगावाट बिजली परियोजना का बांध टूट गया। इसके मलबे में सड़क पर खड़ी एक बोलेरो बह गई। बिजली उत्पादन ठप हो गया है। हिमालयन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के मैनेजर जगत सिंह भंडारी ने बताया कि बांध टूटने के साथ ही डायवर्जन टैंक भी ध्वस्त हो गया है।
 
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इस बीच, राज्य मौसम विज्ञान केंद्र ने पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में अगले 12 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने कैलाश मानसरोवर यात्रियों से अलर्ट रहने और राज्य के अधिकारियों के संपर्क में रहने को कहा है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी सी रविशंकर ने क्षेत्र में भारी वर्षा की चेतावनी के मद्देनजर विभागों को अलर्ट रहने को कहा है।
 
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उधर, मदकोट के गैला गांव में भूस्खलन से गिरे मलबे के नीचे दबने से गांव की नारायणी देवी (46) पत्नी नंदन सिंह की मौत हो गई। घटना के वक्त वह गैला से रतगड़ी गांव की तरफ जा रही थी। नाचनी के भैंसखाल में रामगंगा में एक अज्ञात व्यक्ति का शव उतराता मिला है। भारी बारिश से तहसील मुनस्यारी, धारचूला और बंगापानी क्षेत्र में 20 सड़कें, पांच संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें से सात सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया है। सेराघाट, सुरिंगघाट पुलिया के साथ ही बसंतकोट में तीन पुलियां बह गईं हैं।

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नाचनी क्षेत्र के जाकुला में बला और बिर्थी को जोड़ने वाला पैदल पुल, धारचूला में मालपा और नजंग में बनी पैदल पुलिया और दारमा घाटी के तिजम का पुल भी बह गया है। मुनस्यारी और नाचनी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गोरी नदी के उफान में आने से धपवा-बसंतकोट सड़क में बन रहा निर्माणाधीन पुल क्षतिग्रस्त हो गया। मुनस्यारी ब्लॉक कार्यालय में मलबा घुस गया। इससे कंप्यूटर और कागजात खराब हो गए। विवेकानंद विद्या मंदिर के दो कमरे, मदकोट पुलिस चौकी, मुनस्यारी का पूरा बाजार मलबे से पट गया है। नाचनी में जाकुला नदी का रुख लाछुली गांव की ओर हो गया है। 
 
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मुनस्यारी के मपवालबाड़ा में भूस्खलन के मलबे एक व्यक्ति के 50 खरगोश जिंदा दफन हो गए। रांथी में चार जानवर मलबे में दब कर मर गए। नाचनी में देकुना ग्राम पंचायत के लाछुली गांव में रामगंगा नदी में दो मकान बह गए। रुईसपाटा ग्राम पंचायत के सिरमोला तोक में 12 परिवार खतरे की जद में हैं। इन परिवार के लोगों  ने अन्यत्र शरण ली है।  बनबसा के पचपकरिया और बमनपुरी में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। लोगों के घर चारों तरफ पानी से घिर गए हैं। चोरगलिया ( नैनीताल ) क्षेत्र में कच्चा बंधा नंधौर नदी के उफान पर आने से बह गया।
 
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मदकोट (पिथौरागढ़) में रविवार की अतिवृष्टि से कई लोगों के घर तबाह हो गए, चलने तक के लिए रास्ते नहीं बचे। बिजली और पानी का संकट खड़ा हो गया। मदकोट की पानी की योजना के चैंबर और मेन टैंक में मलबा घुसने से पेयजल सप्लाई ठप हो गई है। क्षेत्र में बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। भूस्खलन से धारचूला, गलाती में भी पेयजल लाइनें ध्वस्त हो गई हैं। भीमताल में पहली बरसात में ही भीमताल डैम की दीवार ढह गई। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी। सिंचाई विभाग के जेई सुजाता हर्बोला ने बताया कि डैम के नीचे की जो दीवार टूटी है। उसे आपदा में दिखाकर प्रस्ताव भेजा जा रहा है। भीमताल में ठंडी सड़क में सिंचाई विभाग की दीवार ढहने से दीवार झील में जा समाई।  वहीं, भीमताल के ठंडी मार्ग पर दीवार के टूटकर सड़क पर आने से यातायात प्रभावित रहा। 
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पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र छियालेख और गर्ब्यांग में खराब मौसम के चलते तीसरे दिन भी वायुसेना के हेलीकॉप्टर गुंजी को उड़ान नहीं भर पाए। कैलाश यात्री पर्यटक आवास गृह में मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं।  पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि अब यात्रियों को मंगलवार को मौसम खुलने पर गुंजी पहुंचाया जाएगा।  वहीं, धारचूला में रविवार सुबह से हो रही तेज बारिश के चलते आदि कैलास के दर्शन कर वापस आ रहे चौथे दल को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 11 यात्रियों को धारचूला से 7 किमी पहले दोबाट में स्थित एसएसबी के कैंप में रात बितानी पड़ी।

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पिथौरागढ़ जिले की बंद सड़कें
1. थल-मुनस्यारी
2. तवाघाट-सोबला
3. तवाघाट-घाटीबगड़
4. जौलजीबी-मदकोट
5. मुनस्यारी-डांडाधार
6. नाचनी-बांसबगड़
7. बांसबगड़-कोटा
8. न्यू सोबला-सेला-तेदांग
9. बसंतकोट-फल्यांटी
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उर्गम घाटी के भेंटा गांव में अतिवृष्टि से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बारिश से एक ही परिसर में संचालित दो स्कूलों के आंगन और विद्यालय भवन की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं जिससे बच्चों को खतरा हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से 70 बच्चों को स्कूल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। भेंटा गांव के जखोला नाला और गरसा गदेरे में पानी उफान पर आने से भेंटा और पिलखी गांव की पेयजल लाइन सौ मीटर तक बह गई। कृषि भूमि बह गई और पैदल रास्ता भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया।
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