सनातन परंपरा में पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए कई व्रतों का जिक्र आता है। इन्हीं में से एक है हरतालिका तीज का व्रत।
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- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है माता पार्वती को वर्षों की घोर तपस्या के बाद इसी दिन भगवान शिव की प्राप्ति हुई थी। इसीलिए कहा जाता है कि इस व्रत को रखने वाली स्त्री को मां पार्वती अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान देतीं हैं।
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पंडित ओमप्रकाश जोशी यहां पहली बार हरतालिका तीज व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए कुछ जरूरी नियम बता रहे हैं।
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हरियाली तीज जिले में धूमधाम से मनाई
- फोटो : अमर उजाला
इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है।
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अगर महिला ज्यादा बीमार है तो उसके बदले घर की अन्य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है।
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व्रत करने वाली महिला को किसी पर भी गुस्सा और पति के साथ क्लेश नहीं करना चाहिए।
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- फोटो : अमर उजाला
व्रत रखा है तो किसी बुजुर्ग का अपमान न करें। इस व्रत में सोने की मनाही है। यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है। रात के वक्त भजन-कीर्तन करें।