हरिद्वार में कोरोना के संकट काल में अपनों को खोने के बाद श्मशान घाट पहुंच रहे पीड़ित परिजनों को श्मशान घाट समितियां कुछ राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। कुछ समाजसेवी भी पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। मृतक के परिजनों को समितियां घाट पर ही अंतिम संस्कार का सामान उपलब्ध करा रही हैं। इसमें लकड़ी से लेकर सामग्री व राल, घी समेत सभी सामान दिया जा रहा है।
इस समय कोरोना से होने वाली मौतों के बाद अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाटों में लाइनें लगी हुई है। पीड़ित परिजनों को अंतिम संस्कार का सामान खरीदने का वक्त भी नहीं मिल रहा है। इसके चलते अब श्मशान घाट समितियों ने ही सामान उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
चंडी घाट श्मशान घाट में शव के अंतिम संस्कार के लिए 3680 रुपये लिए जा रहे हैं। इसमें शव के अंतिम संस्कार से लेकर तमाम अन्य क्रिया करवाई जा रही है। इसमें लकड़ी, राल, देसी घी और नाई दिया जा रहा है।
वहीं कनखल स्थित श्मशान घाट में भी साढ़े छह सौ रुपये की प्रति टन लकड़ी दी जा रही है। इसके साथ ही राल, सामग्री, घी समेत अन्य सामान 1500 रुपये में दिया जा रहा है।
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हरिद्वार में अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
समितियों के साथ ही अब समाजसेवी भी आगे आ रहे हैं। वह श्मशान घाटों पर लकड़ी का इंतजाम करवा रहे हैं ताकि अंतिम संस्कार के दौरान किसी आर्थिक तंगी से जूझने वाले व्यक्ति को कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही अर्थी का सामान का भी पूरा प्रबंधक करा रहे हैं।
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हरिद्वार में अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
चंड़ीघाट श्मशाम समिति के सचिव मान सिंह गुसाईं का कहना है कि 3680 रुपये में लड़की समेत अन्य अंतिम संस्कार में प्रयोग होने वाली सभी सामग्री दी जा रही है। इस विपदा की घड़ी में पीड़ित परिजनों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए यह काम शुरू किया गया है।
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हरिद्वार में श्मशान घाट
- फोटो : अमर उजाला
सेवादार महेंद्र अरोरा का कहना है कि साढ़े छह सौ रुपये में एक टन लकड़ी देने के साथ ही राल, घी व अन्य सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। कुल मिलाकर चार हजार रुपये के करीब का सारा सामान बैठ रहा है।
समाजसेवी भूपेंद्र कुमार का कहना है कि श्मशान घाट पर 20 कुंतल लकड़ी रखवाई हुई है। कोई भी पीड़ित इन लकड़ियों को अंतिम संस्कार के लिए ले सकता है। यदि किसी गरीब को अंतिम संस्कार में किसी चीज की जरूरत है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है।