हरिद्वार कुंभ में आए संत
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, किसी भी कुंभ नगर में रौनक तब आती है जब बैरागी बाबाओं की अणियों का आगमन शुरू होता है। गंगा के द्वीपों पर चारों ओर यज्ञ, हवन और अग्निहोत्र दिखाई पड़ते हैं। दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही अणियों की छावनियां वेदमंत्रों से गूंज उठती हैं। विष्णु, राम और कृष्ण संकीर्तन का भक्तिसागर गंगा के समानांतर बहता नजर आता है। अणियों के महंतों और खालसों के ढेरों पर बहने वाली भक्तिधारा कुंभ महापर्व के भक्तिभाव को द्विगुणित कर देती है। बैरागी छावनियों में ज्ञान की गंगा का प्रवाह देखते ही बनता है।