कुंभ में स्नान के लिए आने वाले अखाड़ों की अपनी दुनिया और अपना कानून व संविधान है। कानून भी बेहद सख्त है। संविधान से ही अखाड़ों की व्यवस्थाएं चलती हैं। महाकुंभ से लेकर हर छोटे-बड़े धार्मिक आयोजन और अखाड़े संचालन में कार्यपालिका व न्यायपालिका अहम भूमिका निभाती है। नागा संन्यासियों से लेकर सर्वोच्च पदों पर आसीन संत महापुरुषों को कानून और संविधान के दायरे में रहना पड़ता है। इससे बाहर जाने पर दंड का प्रावधान भी है।
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े से दुनियाभर के संन्यासी जुड़े हैं। इसकी स्थापना 1145 को हुई है। आठ सौ महामंडलेश्वर, छह हजार श्रीमहंत और लाखों संत अखाड़ा का हिस्सा हैं। सर्वाधिक नागा संन्यासी इसी अखाड़े से जुड़े हैं। इनमें सर्वोच्च पद आचार्य महामंडलेश्वर का है। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि बताते हैं अखाड़ा की 17 सदस्यों की कैबिनेट होती है।
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न्यायपालिका और कार्यपालिका की आठ-आठ सदस्य कैबिनेट के प्रमुख होते हैं। न्यायपालिका के आठ सदस्यों में चार श्रीमहंत और चार अष्ट कौशल महंत होते हैं। कार्यपालिका में चार मंत्री, चार थानापति और एक सभापति होता है। न्यायपालिका सुनवाई करती है, जबकि कार्यपालिका का दायित्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं का संचालन करना है।