एक जुलाई 2017 से पूरे देश में एक कर व्यवस्था लागू की गई है। जीएसटी पर उत्तराखंड के दिग्गजों की क्या है राय, जानिए...
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cm trivendra singh rawat
त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
कर सुधारों को लेकर संविधान संशोधन की प्रक्रिया में यह प्रथम अवसर है, जिसे सभी दलों के साथ ही व्यापक जन समर्थन भी मिला है। प्रदेशवासियों, उद्योग और व्यापार जगत के लोग इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत करें एवं एक समृद्ध तथा प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें।
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मदन कौशिक
- फोटो : file photo
मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री
देश के लिए यह एक गौरव की बात है कि एक देश, एक कर की व्यवस्था लागू हो रही है। निश्चित रूप से जीएसटी लागू होने के बाद देश के अलावा विभिन्न राज्यों में आर्थिक संपन्नता आएगा। उत्तराखंड को भी केंद्रीय करों के रूप में मिलने वाले हिस्से में भी निश्चित रूप से बढ़ोत्तरी होगी।
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सुबोध उनियाल
सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री
निश्चित रूप से जीएसटी का लाभ व्यापारियों और उद्यमियों को मिलेगा। यही नहीं विभिन्न बिंदुओं पर कर देने की मौजूदा व्यवस्था के चलते होने वाला उत्पीड़न भी रुकेगा। वहीं उत्तराखंड में उत्पादों की खपत अधिक है, इसलिए जीएसटी में राज्य को मिलने वाली हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।
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हरक सिंह रावत
- फोटो : AmarUjala
डॉ. हरक सिंह रावत, वन मंत्री
हिंदुस्तान के आर्थिक जगत में जीएसटी का आना किसी बड़ी क्रांति से कम नहीं है। इससे न केवल व्यापारियों और उद्यमियों को लालफीताशाही से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सरकारों के स्तर पर भी विभिन्न प्रकार के सेटअप रखने से मुक्ति मिलेगा। बड़े परिवर्तन को लेकर हमेशा से भ्रांतियां रहती हैं, जो समय के साथ दूर हो जाएंगी।
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रेखा आर्या
- फोटो : AmarUjala
रेखा आर्य, महिला विकास मंत्री
जीएसटी को देश में लागू करना एक साहसिक कदम है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को जाता है। यह निर्णय एतिहासिक है और अर्थव्यवस्था को बदलने में कारगर साबित होगा। इससे न केवल वस्तुएं सस्ती होंगी, बल्कि सिंगल प्वाइंट टैक्स सिस्टम होने से सुविधा भी मिलेगी।
जीएसटी कोई खराब व्यवस्था नहीं है। मगर केंद्र सरकार इसे लागू करने की बहुत जल्दबाजी में है। न उपभोक्ता न ही व्यापारी मानसिक रूप से तैयार नहीं है। प्रदेश में कपड़े पर टैक्स नहीं था। जीएसटी में कपड़ा टैक्स के दायरे में आ जाएगा। फर्नीचर पर भी टैक्स की परिधि में होगा। यानी गरीब आदमी कुर्सी और मेज भी नहीं खरीद सकता। जीएसटी पांच से 12 प्रतिशत के मध्य होता तो कुछ राहत मिलती लेकिन ये 28 प्रतिशत तक कर दिया गया है, जिससे निश्चिततौर पर महंगाई बढ़ेगी।