यह समूचा ब्रह्मांड एक महा विस्फोट से उपजा है। किस योग में वह विस्फोट हुआ, समय पर मनीषी यह जानने का प्रयत्न आज तक कर रहे हैं।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 8
lord shiva image
अनादि त्रिदेवों में से महादेव शिव पहले महायोगी थे। पतंजलि ने योग को सूत्रबद्ध किया और पतंजलि की आचार्य पीठ से योग का विस्तारण न केवल धरती अपितु ब्रह्मांड पर किया गया।
विज्ञापन
3 of 8
yoga day
अध्यात्म और वेदों में योग का विस्तार से वर्णन मिलता है। वास्तव में जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही योग है। योग अहंकार की पुष्टि नहीं करता अपितु अहंकार का विनाश करता है। जिस पल चित की वृत्तियां समाप्त हो जाएं, तब योग का एक कण प्रारंभ होता है।
4 of 8
Yoga
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार योग एक नहीं अपितु अष्टांग का मिलन है। इस मिलन का निष्कर्ष योग है। इस मिलन में यम, नियम, आसन, प्रणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल होते हैं। यम और नियम को छोड़ दें तो प्रणायाम निरर्थक है। अष्टांग योग बनता ही तब है जब आठों तत्व मिल जाएं।
विज्ञापन
5 of 8
योग
- फोटो : SELF
जाने माने सिद्ध योगी प्राण को जीवन शक्ति और अनुशासन को आयाम बताकर प्रणायाम की सृजना करते हैं। भगवान शिव ने पहली बार नाद स्वर से योग का उद्घोष किया था। बाद में वेदों के ऋषियों ने इस महा प्रस्फुटन को व्याख्या और विस्तार दिया। भारतीय धर्मग्रंथों में योग एक अमर साधना के समान है। भगवान कृष्ण स्वयं महायोगी अवतार में अवतरित हुए थे। विष्णु का यह अवतरण संसार को योग की वह अनादि विधा बताने के लिए था, जो ब्रह्मा ने रची थी।
विज्ञापन
6 of 8
योग
- फोटो : SELF
शरीर और मन का जुड़ जाना योग है। योग का वास्तविक उद्देश्य वह समाधि है जो मन की अवस्था से परे है। जब कोई योग के माध्यम से समाधिष्ट होता है, तो वह मन को समाप्त कर योग को जन्म देता है। ऋषि मुनियों के अनुसार वास्तव में योग अध्यात्म की अज्ञात और एकांत में एक छलांग है। भारतीय अध्यात्म को योग और संयोग से ही जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
7 of 8
बदहजमी से छुटकारा पाने के लिए योगासन
वास्तव में योग से ही यह संसार प्रकट हुआ और योग से ही आगे बढ़ता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दुनिया के सात अरब लोगों को यह संदेश देता है कि जो अनंत से चला आ रहा है, उसे अनंत तक पहुंचाने में भागीदार बनो।
आखिर शास्त्रों ने मानव जीवन का यही उद्देश्य बताया है कि परमात्मा की सृष्टि को आगे बढ़ा लिया जाए। हिमालय के ऋषि मुनि मनीषियों के उसी संदेश को जन जन तक फैलाने का कार्य पहले भी करते रहे और किसी न किसी रूप में आज भी कर रहे हैं।