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जानिए कैसे? सरकार की ‘जेब’ में जा रही है जनता की मेहनत की ‘कमाई’

Sat, 30 Jun 2018 09:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी से जेब तो जनता की कटती है। लेकिन खजाना सरकारों का भरता है। राज्य सरकार जहां वैट वसूलती है, वहीं केंद्र सरकार एक्साइज। उत्तराखंड की बात करें तो 2006-07 से मई 2018 तक सरकार ने अकेले पेट्रोलियम पदार्थों से 10,682 करोड़ रुपये टैक्स वसूला है। इससे राजस्व में 2005-06 के मुकाबले साढ़े चार गुना वृद्धि हुई है। अहम बात यह भी है कि राज्य सरकार ये वैट प्रति लीटर पेट्रोल या डीजल की बजाय कीमत पर फीसदी में वसूल रही है।
 
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petrol
वरिष्ठ अधिवक्ता और सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने राज्य कर मुख्यालय से पेट्रोलियम पदार्थों से मिले टैक्स के बारे में सूचना मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने 2005-06 से मई 2018 तक पेट्रोलियम पदार्थों पर राज्यकर से मिली राशि की सूचना उपलब्ध कराई है। सूचना के अनुसार वित्तीय वर्ष 2005-06 के मुकाबले 2017-18 में राज्य सरकार की इस मद में कमाई साढ़े चार गुना से अधिक अर्थात 450.42 फीसदी हो गई है।
 
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पेट्रोल-डीजल
सूचना के अनुसार 2005-06 में पेट्रोलियम उत्पादों पर 324.43 करोड़, 2006-07 में 383.64 करोड़, 2007-08 में 414.90 करोड़, 2008-09 में 457.45 करोड़, 2009-10 में 476.71 करोड़, 2010-11 में 637.93 करोड़, 2011-12 में 734.45 करोड़, 2012-13 में 802.68 करोड़, 2013-14 में 996-05 करोड़, 2014-15 में 1096.35 करोड़, 2015-16 में 1231.24 करोड़, 2016-17 में 1393.70 करोड़ और 2017-18 में 1461.26 करोड़  करोड़ हो गया। वर्ष 2018-19 में मई 2018 तक केवल दो माह में 271.30 करोड़ का टैक्स मिला है। इस प्रकार 2005-06 के मुकाबले में 2012-13 में सरकार की कमाई 247 फीसदी, 2013-14 में 307 फीसदी, 2014-15 में 338 फीसदी, 2015-16 में 380 फीसदी 2016-17 में 430 फीसदी तथा 2017-18 में 450 फीसदी हो गई है।

 

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GST on Petrol
दरअसल, सरकारें पेट्रो पदार्थों पर प्रति लीटर की बजाय उसकी कीमत पर प्रतिशत में टैक्स वसूलती हैं। उत्तराखंड में पेट्रोल पर 25 और डीजल पर 21 फीसदी टैक्स राज्य सरकार वसूल रही है। इससे जेब तो आम अवाम की खाली हो रही है और खजाना सरकार का भर रहा है।

 
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पेट्रोल-डीजल
इस तरह बढ़ी पेट्रोल से कमाई
सरकार को 2007-08 में पेट्रोल से केवल 128.68 करोड़ टैक्स मिला तो 2017-18 में ये 658.50 करोड़ हो गया। यह 2007-08 के मुकाबले 512 प्रतिशत है। पेट्रोल से मिलने वाला टैक्स 2007-08 के मुकाबले 2011-12 में 233 प्रतिशत, 2012-13 में 241 प्रतिशत, 2013-14 में 294 प्रतिशत, 2014-15 में 311 प्रतिशत, 2015.16 में 382 प्रतिशत, 2016.17 में 461 प्रतिशत, 2017.18 में 512 प्रतिशत बढ़ गया है।

 
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Income Tax Reward
प्रति लीटर टैक्स वसूले तो कम होंगी कीमतें
जानकारों के अनुसार सरकार अगर पेट्रोल और डीजल पर कीमत के प्रतिशत के स्थान पर प्रति लीटर एक निश्चित रकम टैक्स के रूप में ले तो कीमतों में खासी कमी हो सकती है। एक अनुमान के अनुसार अगर राज्य सरकार पांच रुपये प्रति लीटर टैक्स वसूले तो उसे टैक्स राजस्व भी 2007-08 के मुकाबले अधिक ही मिलेगा। लेकिन पेट्रो पदार्थों के दामों में 10 से 12 रुपये प्रति लीटर की कमी हो जाएगी। ऐसा करने के लिए सरकार को जीएसटी काउंसिल में भी जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पेट्रो पदार्थ जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।
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