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गंगा के उद्गम स्थल गोमुख की बदहाली का आलम, पत्थरों के बीच मिला 10 साल पुराना कूड़ा, तस्वीरें...

Wed, 25 Sep 2019 10:00 AM IST
अलका त्यागी अंकित कुमार गर्ग, अमर  उजाला, रुड़की 
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- फोटो : अमर उजाला
आपदा और पर्यावरण के नजरिये से गंगा का उद्गम स्थल गोमुख बेहद संवेदनशील है। लेकिन यहां पहुंचने वालों की असंवेदनशीलता की हद देखिए। गोमुख के पास ही कूड़े को जलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, यहां दस साल पुराना कूड़ा तक डंप है। यहां मिला 2008 का बिस्कुट का रेपर इसका जीता जागता गवाह है। 
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- फोटो : अमर उजाला
आईआईटी, रुड़की के छात्रों का एक दल स्वच्छता अभियान के तहत गोमुख पहुंचा तो उसके सामने यह तल्ख हकीकत आई। आलम यह था कि वह अपने साथ कूड़ा उठाने के लिए 40 बोरे लेकर गए थे, जिसमें से 30 बोरे केवल गोमुख के पास पड़े कूड़े से ही भर गए।
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- फोटो : अमर उजाला
गोमुख से कुछ पहले ही ऊंचाई वाले क्षेत्र में दो कूड़ेदान जरूर रखे थे, लेकिन इनमें भी जला कुआ कूड़ा डाला गया था। आग की वजह से एक कूड़ेदान का पेंट तो पूरी तरह मिट चुका था, जबकि दूसरे हिस्से का पेंट भी पिघला हुआ था।  आईआईटी रुड़की के छात्रों के दल ने गोमुख, भोजवासा, तपोवन और चीड़बासा क्षेत्र में ट्रैकिंग कर सफाई अभियान चलाया। अभियान के दौरान दल को गोमुख के पास पत्थरों के बीच में जगह-जगह कूड़ा जमा मिला। 

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- फोटो : अमर उजाला
जिस जगह कूड़ेदान रखे थे, उनके ठीक पीछे तक बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कूड़े के ढेर पड़े थे। इससे साफ था कि कर्मचारी इस कूड़े को गंगोत्री लाने की जहमत ही नहीं उठाते।  टीम ने बीती  20 सितंबर की सुबह भोजवासा कैंप से गोमुख की यात्रा शुरू की। छात्रों के दल में शामिल आईआईटी के उप कुल सचिव एके श्रीवास्तव ने बताया कि पत्थरों के बीच पड़े कूड़े को देखकर ऐसा लग रहा था कि कूड़ेदान हाल में ही उलटा गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
गोमुख और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान पूरा कर आईआईटी रुड़की के 25 छात्रों का दल छह दिन की यात्रा पूरी कर सोमवार को लौटा। इस दौरान छात्रों ने भारी मात्रा में गोमुख, भोजवासा कैंप क्षेत्र, तपोवन और चीड़बासा से कूड़ा एकत्र किया। छात्रों ने 1200 किलो से अधिक कूड़े को गंगोत्री लाकर इसके निस्तारण के लिए नगर पंचायत प्रशासन के सुपुर्द किया। केंद्र सरकार के नमामि गंगे एवं जल शक्ति मंत्रालय के प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी के हिमालयन एक्सप्लोरर क्लब (एचईसी) के छात्रों का यह दल 18 सितंबर को रवाना हुआ था।
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- फोटो : अमर उजाला
पार्क क्षेत्र में कूड़ा जलाकर नष्ट करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। संभवत: कांवड़ सीजन के दौरान कांवड़ यात्रियों ने कहीं कूड़ा जलाया होगा। गंगोत्री-गोमुख ट्रैक पर कूड़ा एकत्र करने के लिए जगह-जगह कूड़ेदान लगाए गए हैं। पार्क प्रशासन क्षेत्र में निरंतर सफाई अभियान चलाकर कूड़ा एकत्र करता है। इसे निस्तारण के लिए गंगोत्री धाम पहुंचाया जाता है। पार्क क्षेत्र में जाने वाले पर्यटक और कांवड़ यात्री कूड़ा न जलाएं, इस पर नजर रखी जाएगी।
-प्रताप पंवार, वन क्षेत्राधिकारी, गंगोत्री नेशनल पार्क
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