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वैज्ञानिकों का खुलासा: अंटार्कटिका में 14 मीटर सिकुड़ गया गंगोत्री ग्लेशियर

Tue, 24 Apr 2018 07:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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photos of chorabari glacier and corabri lake
अंटार्कटिका के पूर्बी हिस्से में स्थित दक्षिणी गंगोत्री ग्लेशियर 10 सालों में 14 मीटर सिकुड़ गया है। यह स्थिति ग्लेशियर की सालाना मॉनीटरिंग में पता चली है।
 
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Glacier
इसके साथ ही दक्षिणी ध्रुव का क्षेत्र हर साल 10 मीटर वेडल समुद्र की तरफ उत्तर में खिसक रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कारण अंटार्कटिका के समुद्रीय तटीय इलाकों की बर्फ गल रही है। वरिष्ठ अंटार्कटिका विशेषज्ञ डॉ. रसिक रविंद्र ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अंटार्कटिका में दिख रहा है। वर्ष 2010 में डॉ. रविंद्र पहली बार देश के विज्ञानियों का अभियान दल लेकर अंटार्कटिका गए थे।

 
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डॉ. रसिक रविंद्र ने सोमवार को वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान में गोल्डन जुबली व्याख्यानमाला के क्रम में दक्षिणी ध्रुव के संबंध में संस्थान के विज्ञानियों को वैज्ञानिक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ विज्ञानी एमके कौल ने वर्ष 1985 में पूर्बी अंटार्कटिका के एक हिमनद को दक्षिणी गंगोत्री का नाम दिया था।

 

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तब से भारतीय विज्ञानी इसकी हर साल मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से यह ग्लेशियर एक दशक में 14 मीटर सिकुड़ा है। दक्षिणी ध्रुव के संबंध में उन्होंने बताया कि इसे दुनिया की धुरी कहा जाता है। यहां माइनस 53 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है।

 
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दक्षिणी ध्रुव में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम है। यहां बर्फ की मोटाई चार किमी है, जिससे यहां ‘मेल्टिंग’ कम होती है। विज्ञानियों के सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि अंटार्कटिका में 20 साल से बड़ी भूकंपीय सक्रियता के रिकार्ड नहीं मिले। हल्का-फुल्का कंपन हो सकता है। अंटार्कटिका के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां पानी की किल्लत है। चारों तरफ बर्फ है। एक बाल्टी बर्फ में चार-पांच ग्लास पानी मिल पाता है। इस मौके पर संस्थान की निदेशक डॉ. मीरा तिवारी, डॉ. पीएस नेगी आदि रहे।
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