गंगा को निर्मल करने के लिए सरकार अभियान चला रही है लेकिन गंगा में स्नान कर अपने पाप धोने वाले श्रद्धालु मां गंगा के साथ क्या कर रहे हैं? खुद देख लीजिए...
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- फोटो : AmarUjala
गंगा को स्वच्छ रखने के लिए हरकीपैड़ी पर पॉलीथिन पूरी तरह बैन है पर कौन इन्हें रोके। ये बेच रहे हैं और भक्त खरीदे चले जा रहे हैं।
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सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद गंगा घाट पर ही पूजा और हवन सामग्री के साथ पॉलीथिन भी घाट पर ही छोड़ गए। यात्रियों ने प्लास्टिक चटाई घाट पर बैठने के लिए इस्तेमाल करने के बाद वहीं छोड़ दिया। गऊघाट पुल के नीचे अतिक्रमण के चलते यात्रियों का आना जाना मुश्किल रहा।
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कार्तिक पूर्णिमा स्नान से पहले हटाई गई पॉलिथीन और प्लास्टिक की दुकानें शुक्रवार को जस की तस लगी रही। मालवीय द्वीप, नाईसोता, सुभाषघाट क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में वेंडर हाथ में प्लास्टिक की कैनी, प्लास्टिक के थैले, चटाई यात्रियों को बेचते रहे।
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नगर निगम के फूल-फरोशी के ठेकेदारों ने भी प्लास्टिक व पॉलिथीन का सामान बेचा। हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के पास फिर अतिक्रमण हो गया। कांगड़ा घाट की दुकानें प्लास्टिक और पॉलिथीन से भरी थी।
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कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी समेत विभिन्न घाटों पर पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
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नियत घाटों पर जाकर संकल्प पूजा और उद्यापन संपन्न कराए। श्रद्धालुओं ने जल में खड़े होकर उगते सूर्य को जल प्रदान किया।
कार्तिक स्नान सोमवार को तड़के चार बजे से हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर प्रारंभ हो गया था। आरंभ में घाटों पर अधिक भीड़ नहीं थी, लेकिन दिन निकलने के साथ दिल्ली और समीपवर्ती राज्यों से काफी श्रद्धालु पहुंचे।