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पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि वैदिक पंचांगों के मुताबिक चतुर्थी तिथि के दिन गुरु स्वाति संयोग होने से श्रीगणेश मूर्ति की स्थापना सुख समृद्धि के साथ सर्व सिद्धिदायक भी होती है। इस बारे में प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी अरविंद शर्मा का कहना है कि 27 नक्षत्रों में स्वाति नक्षत्र का स्थान 15वां है। इसे शुभ और कार्य सिद्ध नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र के अधिपति देवता वायुदेव होते हैं। इस नक्षत्र के चारों चरण तुला राशि के अंतर्गत आते हैं, जिसका स्वामी शुक्र है। शुक्र धन, संपदा, भौतिक वस्तुओं और हीरे का प्रतिनिधि ग्रह है।