गणेश चतुर्थी के मौके पर बप्पा के जयकारों से शहर गूंज उठा। गणपति बप्पा मोरया के साथ ही जगह-जगह गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई। इससे पहले शहर के विभिन्न इलाकों में भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। तस्वीरें...
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यात्रा में झूमते श्रद्धालुओं ने गणेश जी को पंडाल में विराजमान कराया। इसके पश्चात प्राण-प्रतिष्ठा और विशेष पूजा-अर्चना कर सामाजिक संदेश भी दिए गए। मोती बाजार युवा समिति की ओर से निकली रथयात्रा में चूहे विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। दरअसल चूहे की पोशाक में युवाओं ने गणपति जी का रथ चलाया। रथ को विशेष तौर पर झूमरों से सजाया गया था।
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गणपति जी की प्रतिमा के साथ मोती बाजार से शुरू हुई रथ यात्रा धामावाला, पलटन बाजार से होते हुए वापस पंडाल पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमेे। कार्यक्रम संयोजक गौरव मितलेश ने बताया कि पहली बार रथ यात्रा को चूहों ने चलाया, क्योंकि गणेश जी का वाहक चूहा है इसलिए इस बार यह कांसेप्ट रखा गया। बताया कि इस बार लाल बाग के राजा की मूर्ति मुंबई से लाई गई है।
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गणपति युवा सेवा समिति डांडीपुर-मन्नुगंज की ओर से इस बार मंच की सज्जा पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंच पर गणपति जी की आकर्षक प्रतिमा के पीछे ही कई सूंड बनाई गई हैं। वहीं बप्पा के दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि की प्रतिमा बनाई गई है। हालांकि समिति की ओर से पिछले दो सालों से शोभायात्रा नहीं निकाली गई है। आयोजक मुकेश प्रजापति ने बताया कि पंडितों के अनुसार जब तक प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हो जाती तब तक उसकी यात्रा नहीं निकालते। यही वजह है कि यहां से रथयात्रा नहीं निकाली जाती है।
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क्लेमनटाउन स्थित शिव रघुनाथ मंदिर से धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर से शुरू हुई यात्रा मछली तालाब, टर्नर रोड, गुरुद्वारा कॉलोनी, सोसायटी एरिया होते हुए वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान बप्पा की प्रतिमा के साथ ही अन्य देवी-देवताओं की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। समिति के अध्यक्ष दिनेश जुयाल ने बताया कि पंडालों में सुबह-शाम विशेष पूजा-अर्चना होगी। इसके साथ ही उत्तराखंड के कलाकारों को हर दिन भजन प्रस्तुत करने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है।
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खुड़बुड़ा स्थित गणेश मंदिर से भी शोभायात्रा निकाली गई। सुबह नौ बजे गणेश जी का अभिषेक किया गया। शाम चार बजे मंदिर से यात्रा निकली जो कि कांवली रोड, सहारनपुर चौक, झंडा बाजार, तिलक रोड होते हुए वापस मंदिर पहुंच संपन्न हुई। 26 अगस्त से मंदिर में भजन संध्या होगी। धर्मपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर से भी गणपति जी की शोभायात्रा निकाली गई। इसके पश्चात गणपति जी को मंदिर में विराजित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
बप्पा अब 10 दिनों के लिए पंडालों में विराज गए हैं। 11वें दिन मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। वहीं हर दिन पंडालों से अलग-अलग सामाजिक संदेश दिए जाएंगे। पहले दिन कहीं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का संदेश दिया गया तो कहीं पर्यावरण संरक्षण का। इस मौके पर हाल ही में खतौली में हुए रेल हादसे में मारे लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की गई।