friendship day
इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार जाति कुल के बंधन को छोड़कर दो अजनबी परिवारों के पुरुषों के बीच मिज्जू लगाने की परंपरा से तत्कालीन सामाजिक सुरक्षा का बोध भी होता है। कमजोर ब्राह्मण की सशक्त ठाकुर से मित्रता हो या कमजोर दलित की किसी दूसरे सक्षम वर्ग से मित्रता, मिज्जू परंपरा का सबसे सुखद पहलू है। वर्तमान इंटरनेट युग में सोशल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश में कहीं भी लोगों से मित्रता बनाई जा सकती है, लेकिन यह मित्रता न तो भावनात्मक रूप से मजबूत और टिकाऊ होती है और ना ही इसकी मित्रता को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है।