यह चार दिसंबर 1993 की बात है। अविभाजित उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बन चुकी थी। मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री हो गए थे। जश्न, स्वागत और तमाम तरह के कार्यक्रमों में मुलायम सिंह यादव व्यस्त थे। अचानक से उनका देहरादून का कार्यक्रम तय हो गया। वरिष्ठ पत्रकार विपिन बनियाल बताते हैं कि....
सभी लोग हैरत में थे कि मुलायम अपने गांव सैफई भी अभी तक नहीं जा पाए हैं, ऐसे में देहरादून कैसे जा रहे हैं। मगर यह मुलायम थे, जिन्हें उनके इरादों में सख्त माना जाता था। वह सरकार गठन के एक सप्ताह के भीतर ही 11 दिसंबर 1993 को देहरादून पहुंच गए। वे ओल्ड मसूरी रोड स्थित उस स्वामी रामतीर्थ आश्रम में गए, जहां पर साल भर पहले उन्होंने ऐलान किया था-यदि सपा की सरकार बनेगी, तो अपने गांव सैफई बाद में जाऊंगा, पहले देहरादून आऊंगा।
उत्तराखंड आंदोलन के बाद मुलायम सिंह यादव भले ही पहाड़ से दूर होते गए, लेकिन उनकी समाजवादी पार्टी के गठन के बीज उत्तराखंड की धरती पर ही पडे़ थे। इस बात को मुलायम सिंह यादव ने हमेशा याद रखा, हालांकि उत्तराखंड आंदोलन के बाद न तो उन्हें और न ही उनकी समाजवादी पार्टी को पहाड़ ने कभी स्वीकार किया।