आधार कार्ड बनवाने को लेकर इस बुजुर्ग की कहानी आपकी आंखे नम कर देंगी...
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जखोली ब्लाक के दुर्गम घंघासु बांगर क्षेत्र के 70 वर्षीय बुजुर्ग अपने दिव्यांग बेटे का आधार कार्ड बनाने के लिए उसे पीठ पर लादकर 70 किमी का सफर तय कर रुद्रप्रयाग पहुंचा। अब, कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उम्मीद है कि अगले माह से दिव्यांग को पेंशन मिलने लगेगी।
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आधार कार्ड
घंघासू-बांगार के श्याम सिंह रावत का 35 वर्षीय पुत्र लूला सिंह बचपन से दिव्यांग है। उसे समाज कल्याण विभाग की ओर से पेंशन मिलती है। लेकिन आधार कार्ड न होने से कई माह से पेंशन नहीं मिल पाई है। गांव सहित ब्लाक मुख्यालय जखोली में भी आधार कार्ड बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है।
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ऐसे में बुजुर्ग पिता अपने दिव्यांग बेटे को पीठ पर लादकर स्वयं रुद्रप्रयाग आ पहुंचा। 70 किमी के सफर में वे कई मील पैदल भी चले। बाजारों में भी एक वाहन से दूसरे वाहन में सवार होने के लिए बुजुर्ग बेटे को पीठ पर ले जाता रहा। लेकिन यहां भी उनका आधार कार्ड नहीं बन पाया।
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बुजुर्ग ने बताया कि जरूरतमंदों को सुविधाएं देने के तमाम दावे हो रहे हैं। बताया कि उनका दिव्यांग बेटा घर में भी एक जगह पर बैठा रहता है। खाना खिलाने व नहलाने के लिए एक व्यक्ति को उसके साथ रहना पड़ता है। रावत का कहना है कि दिव्यांगों सहित अन्य जरूरतमंदों को के आधार कार्ड, पेन कार्ड व फोटो पहचान बनाने के लिए दूरस्थ गांव व कस्बों में शिविर लगाने चाहिए।
साथ ही दिव्यांग का समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी होनी चाहिए, जिससे वे अपनी उम्र जी सके। इधर, समाज कल्याण अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि पेंशन भुगतान के लिए वर्ष में एक बार पेंशनर का सत्यापन जरूरी है। इसलिए आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं।