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Holi 2019: पांच दिन चलने वाले विशेष योग प्रारंभ, होली पर आना अति शुभ, बढ़ेगी सुख-समृद्धि 

Mon, 18 Mar 2019 11:57 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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रविवार को आमलकी एकादशी से पांच दिन चलने वाले विशेष योग प्रारंभ हो गए हैं। सूर्य के मीन राशि में जाने के बाद पांच योगों का होली पर आना अति शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन योगों में होली पड़ने से धरती पर सुख-समृद्धि बढ़ती है।
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रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आमलकी एकादशी का व्रत रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा की। पुष्य नक्षत्र में श्रीवत्स योग से इन प्रमुख योगों का शुभारंभ हुआ है। पांच दिनों तक सौम्य, कालदंड, स्थिर और मातंग योग पड़ रह हैं।
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होली के रंग मातंग योग में खेले जाएंगे, जब चंद्रमा कन्या राशि में प्रविष्ट हो जाएंगे। पांच योगों का शुभारंभ पुष्य नक्षत्र से हुआ, जबकि पांच दिनों में आश्लेषा, मघा, पूफा और उफा नक्षत्र लगातार चार दिन पड़ेंगे। इन नक्षत्रों में सुमधुर योग आने से होलाष्टकों कर प्रभाव कम हो जाता है।

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मान्यता है कि होलाष्टक के आठ तंत्र-मंत्र के लिए बने हुए हैं। इन सिद्ध योगों के कारण बुरे ग्रहों का प्रभाव धरती पर नहीं पड़ता। पांच दिन बाद चैत्र कृष्ण पक्ष का शुभारंभ हस्त नक्षत्र और अमृत योग में होगा। इस प्रकार शुभ योगों का आगमन लगातार चलता रहेगा।
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सोमवार को प्रदोष पर्व मनाया जाएगा, जबकि मंगलवार को महेश व्रत और वृष दान का शास्त्रीय विधान अनिष्ट टालने के लिए है। होली के इन आठ दिनों में कोई मांगलिक कार्य तो नहीं होते, अलबत्ता अमंगल के अनेक कारण तंत्र-मंत्र के चलते बने रहते हैं। शुभ नक्षत्र और शुभ योग होलाष्टकों का काफी हद तक शमन कर देंगे।
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होली का त्यौहार पूर्णिमा के दिन 21 मार्च को मनाया जाएगा। उस दिन पूर्ण तिथि पूर्णिमा के रूप में बनी रहेगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार फाग तब पड़ता है, जब पूर्णिमा में प्रतिपदा का प्रवेश हो जाए। इस बार ऐसा नहीं होगा।
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इसका कारण यह है कि प्रतिपदा तिथि का क्षय चैत्र कृष्ण पक्ष के पहले ही दिन हो रहा है। इसके बावजूद कृष्ण पक्ष के दिन द्वादशी तिथि के दो दिन पड़ जाने से 15 ही बने रहेंगे। इस संवत का समापन पांच अप्रैल को होगा और नया संवत छह अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगा।
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