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अमर उजाला मास्टर क्लास में अली अब्बास जफर ने युवाओं को दिया बॉलीवुड में सफल बनने का हिट फॉर्मूला

Fri, 13 Sep 2019 01:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • अमर उजाला मास्टर क्लास में फिल्म डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने क्रिएटिव सोचने और करने का दिया गुरुमंत्र
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- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला मास्टर क्लास में फिल्म डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने क्रिएटिव सोचने और करने का गुरुमंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अगर आपका आइडिया हिट रहा तो फिल्म सुपरहिट होनी तय है। बशर्त फिल्म की बाकी सब चीजें भी उसी तरह बेहतर हो। एक दिन में कोई भी सुपरस्टार नहीं बनता। उसके लिए आपको वर्षों मेहनत करनी होती है। अपनी मेहनत और हुनर पर विश्वास रखते हुए लगातार संघर्ष करने का माद्दा रखना पड़ता है। तब जाकर कहीं आपको एक मौका मिलता है। मौके को भुनाते हुए अपना बेस्ट देने वाले ही आगे बढ़ते हैं। 

 
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- फोटो : अमर उजाला
अली ने कहा कि फिल्म उद्योग में सभी तरह के लोग हैं। कई बार आपको अच्छे और सही दिशा दिखाने वाले लोग मिलेंगे। लेकिन, कुछ ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो आपको गलत ले जा सकते हैं। जब आप फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे होंगे तो कई लोग आपको बरगलाएंगे, घुमाएंगे, गलत करने का प्रयास करेंगे। ऐसे में आपको भी अच्छे-बुरे की पहचान करनी आनी चाहिए। शॉर्टकट से सफलता पाने की तमन्ना में कई बार हम वह सब करते हैं, जो नहीं करना चाहिए। जब काम नहीं आता तो फिर इस तरह के शॉर्टकट ढूंढे जाते हैं, लेकिन यह गलत है। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि एक समय आया जब बॉलीवुड में एनआरआई कल्चर चल रहा था। हीरो-हीरोइन विदेश में पैदा होते या कहानी वहीं से जुड़ी होती। तब मैंने जमीन से जुड़े किरदारों पर काम करना शुरू किया। सुल्तान जमीन से जुड़ा ऐसा ही किरदार था, जिसकी कहानी लोगों को खूब पसंद आई। अली ने कहा कि फिल्म बनाना एक लड़ाई लड़ने जैसा है। धूप-गर्मी-बारिश-तूफान चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, हमें अपना काम करना होता है। फिल्म निर्माण से जुड़ी यूनिट युद्ध लड़ने की तरह काम करती है। उन्होंने ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म के एक सीन का उदाहरण दिया, जिसे माइनस 26 डिग्री तापमान में फिल्माया गया था। 
 

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- फोटो : अमर उजाला
अली की फिल्मों में मनोरंजन की हैवी डोज के साथ देशभक्ति का संदेश भी होता है। इस पर अली ने कहा कि उनके खून में देशभक्ति है। उनके पिता फौज में थे। उनका बचपन देहरादून में बीता है। यहां भारतीय सैन्य अकादमी को देखकर उनके अंदर देशप्रेम का भाव पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि फिल्म यूनिट से जुड़े सब लोग केवल निर्देशक की सोच को आगे बढ़ाते हैं। निर्देशक के दिमाग में फिल्म का फ्रेम होता है। उसमें कैसी अदाकारी हो, कैसी लोकेशन और बैकग्राउंड, सब उसे पता होता है। जब वह यूनिट से इसे साझा करता है तो सब लोग मिलकर उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
सुल्तान फिल्म में लीड रोल के लिए सलमान खान से अली की मुलाकात कैटरीना कैफ ने करवाई। अली ने बताया कि फिल्म ‘न्यूयॉर्क’ की शूटिंग के दौरान कैटरीना से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई। कैटरीना ने उनकी सलमान से मुलाकात कराई। केवल 15 मिनट की मुलाकात के बाद सलमान ने फिल्म के लिए हां कर दी। अली के अनुसार सलमान जिंदादिल और मस्त रहने वाले इंसान हैं। लोग अक्सर पूछते हैं कि मूडी सलमान के साथ आपने काम कैसे किया। तब मैं कहता हूं कि यह सीक्रेट में किसी को नहीं बताऊंगा। मुझे लगा कि वह तो पहाड़ है, अपनी जगह से नहीं हिलेंगे। साथ चलना है तो हमें ही नदी बनकर रास्ता ढूंढना होगा। मैंने वही किया और नतीजा सबके सामने है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
अली ने बताया कि सुल्तान फिल्म के लिए उन्होंने पहले दंगल नाम सोचा था। तब तक यह नाम उपलब्ध भी था। मुझे पता चला कि नितेष भी पहलवानी पर कोई फिल्म बना रहा है। हम दोनों ने बातचीत की और एक-दूसरे की स्क्रिप्ट पढ़ी। तब हमें लगा कि दोनों कहानियां पूरी तरह अलग हैं, इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी। फिल्म इंडस्ट्री की राह आसान नहीं है। लोग वर्षों तक मेहनत करने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाते। लेकिन अगर आपके अंदर एक्स फैक्टर है, तो मुश्किलें आसान हो सकती है। आपको सबसे अलग देखने और करनी की कोशिश करनी होती है। जो लोग बिना मेहनत किए या रातों-रात स्टार बनना चाहते हैं, उनके लिए इंडस्ट्री नहीं है। 
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ali abbas zafar - फोटो : अमर उजाला
मुझे आज भी नहीं लगता कि मैंने बॉलीवुड में अपना मुकाम बना लिया है। मैं पहली पीढ़ी से हूं। मैं आज भी खुद को बाहरी मानता हूं। जरूरी नहीं कि मेरी आने वाली पीढ़ी भी यही काम करे। अली ने बताया कि नए लेखकों को किसी को भी अपनी स्क्रिप्ट ईमेल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में यह काफी व्यवस्थित इंडस्ट्री बन गई है। वहां स्क्रिप्ट राइटर्स, जूनियर आर्टिस्ट समेत अन्य के संगठन बने हुए हैं। वहां रजिस्टर करने के बाद अगर किसी को आपको काम पसंद आया तो फायदा मिल सकता है। 
 

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- फोटो : अमर उजाला
12वीं में अली के 85 फीसदी अंक थे, जिसके चलते उन्हें किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। इसके बाद उन्होंने थिएटर करना शुरू कर दिया, जिससे उनकी परसेंटेज गिरकर 46 पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि आज तक उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं ली है। अब कॉलेज वाले बुला रहे कि आप आओ, हम एक प्रोग्राम कर आपको डिग्री देंगे। साइंस की पढ़ाई छोड़कर थिएटर और फिल्म निर्माण में जाने के उनके फैसले पर पिता ने सख्त नाराजगी जताई। अली ने बताया कि जब उन्होंने अपने परिवार में यह बात बताई तो पिता ने कहा कि तुम दिल्ली जाकर नशा तो नहीं करने लगे। लंबे समय तक उनकी यह नाराजगी जारी रही। 
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एक निर्देशक किसी भी कलाकार में सबसे पहले क्या देखता है। यह सवाल अली के सामने आया तो उन्होंने बताया कि हर कलाकार अलग होता है। लेकिन फिर भी आत्मविश्वास और रोल के अनुसार ढलने का गुण होना चाहिए। भाषा पर पकड़ होनी जरूरी है। 
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