ग्राहकों को मूर्ख बनाना अब कार कंपनियों को महंगा पड़ सकता है। जल्दी ही प्रदेश में यह व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है कि अगर तथ्य छिपाकर ग्राहक को वाहन बेचा जाता है तो कंपनी को एक करोड़ रुपये जुर्माना झेलना पड़ेगा।
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गाड़ी चलाना
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इसके साथ ही हर व्यक्ति को अपने वाहन में बेबी कार बेल्ट लगानी पड़ेगी, ताकि बच्चे की सुरक्षा बनी रहे। पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी ऑन ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म एंड कल्चर की बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है।
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मंगलवार को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन के संबंध में पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी की बैठक दिल्ली में हुई। इसमें संशोधनों के संबंध में उत्तराखंड परिवहन विभाग ने अपना पक्ष रखा। प्रदेश के मोटर वाहन एक्ट में 223 प्रावधान हैं।
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इनमें 88 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित है। कंपनियों की ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में सख्त प्रावधान किए जाने के मामले में प्रदेश के परिवहन विभाग ने अपनी सहमति जता दी है।
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driving
इसके साथ ही पूरे राज्य में कहीं भी ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन करने के संबंध में पार्लियामेंटरी कमेटी के निर्देश पर भी हामी भर दी गई है। इसके साथ ही कामर्शियल लाइसेंस की वैद्यता की अवधि तीन से बढ़ाकर पांच साल की जाएगी। लाइसेंस नवीनीकरण में रिफ्रेशर कोर्स अनिवार्य कर दिया गया है।
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कमेटी ने यह भी कहा है कि अगर किसी दुपहिया वाहन के रजिस्ट्रेशन में देरी होती है तो वाहन स्वामी के साथ डीलर पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। 23 सांसदों की सदस्यता वाली कमेटी के समक्ष प्रदेश का पक्ष अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह और सहायक आयुक्त राजेंद्र मेहरा ने रखा।
इन पर जताई असहमति
-ओवर लोडिंग पर जुर्माना 3 से बढ़ाकर 22 हजार किया जाना
-परिवहन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी के नियमों के उल्लंघन पर दोगुना जुर्माना
-सरकारी वाहनों का बीमा कराया जाना
-अक्तूबर, 2018 से वाहनों की फिटनेस की जांच कंप्यूटर से कराना
-रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वाहन का पेश न करना